शहजाद नदी की बाढ़ में बह गया पुल
ललितपुर। गोविंद सागर बांध के गेट 24 घंटे खुले रहने के साथ साइफन चलने से पानी का दबाव शहजाद नदी का पुल झेल नहीं सका। पानी के वेग ने शहजाद नदी का आधा पुल धराशायी कर दिया है, इससे पुराना रजवारा रोड पर आवाजाही बाधित हो गई है।
शहर में शहजाद नदी में तीन पुल बने हुए हैं। इनमें पुराना रजवारा रोड के पुल की मरम्मत वर्षों से नहीं हुई है। पिछले साल ही इस पुल को नुकसान पहुंच गया था। जिस पर नगर पालिका परिषद ने क्षतिग्रस्त स्थान पर मिट्टी डालकर आवाजाही को सामान्य बना दिया था। बारिश से पहले इसकी मरम्मत की मांग की जा रही थी लेकिन नगर पालिका ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बीते दिनों गोविंद सागर बांध के गेट व साइफन साथ खुलने से शहजाद नदी में पानी का वेग तेज हो गया। इसे पुल झेल नहीं पाया और पुल का आधा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इससे मार्ग पर पूरी तरह आवागमन ठप हो गया है। इस मार्ग पर पंचमुखी मंदिर, बलखंडी मंदिर स्थित है, जहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा यह मार्ग ग्राम पनारी को भी जोड़ता है। जो लोग सीधे बस्ती में जाना चाहते हैं, वह इसे शार्टकट मानकर इसका प्रयोग करते थे। अब इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय लोगों में काफी मायूसी देखी जा रही है। खासकर, दोनों मंदिरों के श्रद्धालु विचलित नजर आए। उनका कहना है कि इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से मंदिर जाने की समस्या खड़ी हो गई है। उधर, मोहल्ला नदीपुरा से ललितेश्वरी मंदिर को जोड़ने वाला शहजाद नदी का नए पुल की हालत खस्ता हो गई है। इसमें जगह-जगह गड्ढे उभर आए हैं साथ ही एक जगह पुल में कटाव होने से बड़ी नाली सी बन गई है। यदि गोविंद सागर बांध के दोबारा गेट खुले तो नए पुल के क्षतिग्रस्त होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चिंता देखी जा रही है।
हाइवे को छोड़ शहर में नहीं बचे सुरक्षित पुल
राष्ट्रीय राजमार्ग के पुल को यदि छोड़ दिया जाए तो शहर में अब एक भी पुल यात्रा के लिए सुरक्षित नहीं बचे हैं। नदीपुरा मोहल्ले में स्थित शहजाद नदी का पुल सालों पुराना है। जिस पर भारी वाहनों की आवाजाही पहले से ही बंद कर दी गई है। वर्तमान में उससे हल्के वाहन निकाले जाते हैं। बीते दिवस आई बाढ़ में नए पुल को भी नुकसान पहुंचा है। पुराना रजवारा रोड का पुल किसी तरह आवागमन के लिए खुला था, अब वह भी बंद हो गया है। जेल चौराहे का ब्याना नाला का पुल भी वर्षों पुराना है जो काफी संकरा है। इस पुल के स्थान पर नए पुल की मांग लंबे समय से चली आ रही है।
कैसे विहार पर निकलेंगे विमान
डोल ग्यारस पर शहर के अधिकांश देवालयों से भगवान विमानों में बैठकर विहार के लिए निकलते हैं। इस दौरान सुम्मेरा तालाब में अभिषेक व पूजा अर्चना होती है। इसमें बलखंडी मंदिर व पंचमुखी मंदिर से भी विमान यात्रा में शामिल होते हैं। अब मार्ग क्षतिग्रस्त होने से हर किसी के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है कि विमान विहार के लिए कैसे निकल पाएंगे?
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स्थानीय सभासद यदि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाते हैं तो उसका टेंडर कराकर निर्माण कराया जाएगा।
मधुसूदन जायसवाल, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद