- विशेष कार्य योजना तैयार न होने से नहीं आया है नस्ल में सुधार
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। शासन ने गोवंश आश्रयस्थल पर नस्ल सुधार के लिए नंदियों को भेजने व उस पर निरंतर निगरानी रखने की कार्ययोजना तैयार की थी। लेकिन पशुपालन विभाग ने आश्रयस्थलों पर जालौन व सैदपुर फार्म हाउस से 115 नंदियों तो भेज दिए। इसके बाद नस्ल सुधार पर नियमित देखभाल व निगरानी न होने के कारण कोई विशेष परिणाम सामने नहीं आए हैं।
शासन ने गोवंश आश्रयस्थल पर नस्ल सुधारने के लिए जालौन व सैदपुर से जिले के गोवंश आश्रयस्थल कल्यानपुरा, डगडगी, पिपरिया, सौजना, अमझरा में करीब 115 नंदी को भेजा था। इसमें जालौन से साहीवाल प्रजाति के 24 व हरियाना नस्ल के 91 सैदपुर फार्म हाउस से मंगाकर भेजे गए थे। शासन के आदेश पर यह छह माह से यह नंदी की आपूर्ति गोवंश में की गई है। पशुपालन विभाग ने इसकी कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की है।
पशुपालन विभाग के अनुसार शासन के आदेश पर गोवंश आश्रयस्थल पर इन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद जो गाय प्रजनन योग्य होगी, वह इन नंदी के संपर्क में आ जाएगी। साथ ही इन्हें जो 50 रुपये प्रतिदिन की खुराक निर्धारित अन्य गोवंश के अनुसार तय है। इन नंदी की देखभाल के भी कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। विभाग ने नस्ल सुधार की शासन मंशा को फौरी तौर पूर्ण कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। इन पांच गोशालाओं में करीब 500 गोवंश प्रजनन योग्य देखकर यह नंदी भेजे गए थे। इस संबंध में डॉ. भगवान सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि नस्ल सुधार के लिए नंदी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। जिसके तहत पांच गोवंश आश्रय स्थल पर 115 नंदी छोड़े गए हैं।