ललितपुर। अनुदेशक भर्ती में नियुक्त हुए दो अनुदेशकों की बीपीएड डिग्री सत्यापन में फर्जी पाई गई, इस पर बीएसए ने दोनों अनुदेशकों को हटाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए हैं, इससे विभाग में खलबली मच गई है।
बीते माह बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन संचालित पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 87 अनुदेशकों की विषयवार भर्ती की गई थी। इस दौरान दो विश्वविद्यालयों के अंक पत्रों की वैधता पर सवाल उठाए गए थे, इस पर जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी वीर सिंह को जांच अधिकारी नामित कर दिया था। मामला यहीं तक नहीं रहा, कुछ अभ्यर्थियों ने जन सूचना अधिकार के तहत चयनित अभ्यर्थियों के अंक पत्रों की छाया प्रति प्राप्त की, इसमें एक विश्वविद्यालय के कई अंक पत्रों की वैधता पर भी अंगुलियां उठाई गईं। इसके मद्देनजर बीएसए रामपाल सिंह ने संबंधित विश्वविद्यालय से अंक पत्रों का सत्यापन कराया। इसमें दो अनुदेशकों की बीपीएड डिग्री फर्जी निकली।
बीएसए ने भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से प्राप्त आख्या के आधार पर दोनों अनुदेशकों को हटाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए हैं। एक अनुदेशक ब्लाक जखौरा है तो दूसरा ब्लाक बार का है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी वीर सिंह की जांच आख्या आना शेष है। इस जांच में भी सनसनीखेज खुलासा होने के आसार हैं।
डायट में भी पकड़े गए थे दो प्रशिक्षु
जिले में फर्जी अंक पत्रों के मामले एक के बाद एक उजागर हो रहे हैं। इससे पहले जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में दो बीटीसी प्रशिक्षुओं की इंटरमीडिएट की अंक तालिकाएं फर्जी पाई गई थी, जिसके बाद उन्हें बीटीसी बैच से पृथक कर दिया गया था।
दो विश्वविद्यालयों की रिपोर्ट पर नहीं हुई कार्रवाई
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दो अनुदेशकों की अंक तालिकाएं फर्जी पाए जाने पर तो कार्रवाई कर दी। लेकिन, तत्कालीन बीएसए के समय प्राप्त हुई दो विश्वविद्यालयों की जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सूत्र बताते हैं कि एक विश्वविद्यालय ने तो अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है, उनके यहां से ऐसे कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हुए हैं। नवागत बीएसए ने उस रिपोर्ट को अभी तक छुआ भी नहीं है, जिससे अंक तालिकाएं बनवाने लोगों के हौंसले बुलंद बने हुए हैं।