डोंगराखुर्द। अमझराघाटी में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर फंसे मजदूरों को नौ बसों से उन्हें रवाना कर दिया गया। लेकिन, अभी भी एक सैकड़ा लोग फंसे हुए हैं।
कोराना संकट ने पूरे देश को संकट में डाल दिया है। एक तरफ वायरस के संक्रमण के खतरे से लोग डरे सहमे हैं तो दूसरी तरफ बेवश और लाचार कामकाजी मजदूर हैं, जो लॉकडाउन के कारण एक दूसरे राज्य की सीमाएं सील होने की वजह से परदेश में फंसकर रह गए हैं। महानगरों से भूखे- प्यासे सैकड़ों मील की यात्रा पैदल चलकर आए यह मजदूर अब यूपी और एमपी बार्डर पर रोक दिए गए हैं।
इन मजदूरों को भोजन व पानी की व्यवस्था बनाना दोनों राज्यों के प्रशासन के लिए चुनौती से कम नहीं है, जो मदद उन तक पहुंच रही है, वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। बच्चों व महिलाओं का बुरा हाल है। वह अपने घर पंहुचने के लिए हर आने- जाने वाले से मदद मांग रहे हैं।
बुधवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार मिश्र और अपर पुलिस अधीक्षक एके विजेता ने क्षेत्र का दौरा किया और यहां फंसे मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था की। देर शाम नौ बसों में से प्रत्येक बस में 32 लोगों को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए बैठाया गया और 288 मजदूरों को यहां से रवाना कर दिया गया। इन लोगों को प्रदेश के अलग - अलग 32 जिलों में भेजा जाएगा।
नेशनल हाइवे पर पैदल चल रहे मजदूर
हैदराबाद से आए दस लोगों ने बताया कि फैक्टरी में काम करने गए थे। 22 दिन काम कर पाए और लॉकङाउन हो गया। इसके बाद एक माह इंतजार किया, लेकिन प्रशासन ने वहां से भगा दिया। जालौन जिले के बर्द गांव जाना है। धूप व गर्मी का मौसम है, ऐसे में बुरा हाल हो रहा है। क्योंकि आने जाने का साधन नहीं है। इसलिए पैदल चलना मजबूरी है।
महावत समुदाय के लोग फंसे
अमझरा घाटी यूपी और एमपी सीमा पर पुलिस ने रोक दिया है। 45 लोग, नरसिंहपुर मध्य प्रदेश से आए हुए हैं। लल्लू महावत ने बताया कि है कि पांच दिन मालथौन टोल प्लाजा पर रुके रहे। उसके बाद यहां आ गए। मनोज महावत ने बताया कि मथुरा से नगीना पत्थर लाकर अगूंठी बनाने का काम करते हैं और देश का भ्रमण करते हैं। जिला जालौन के मुरारखेरा गांव जाना है।
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