तमाम अटकलों और दावों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों पर ही अपना दाव लगाया है। ललितपुर से रामरतन कुशवाहा और महरौनी से मनोहर लाल पंथ मन्नू को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा प्रत्याशी पिछले चुनाव में ललितपुर में तीसरे और महरौनी में दूसरे स्थान पर रहे थे।
भाजपा पिछले 21 साल से ललितपुर विधानसभा व 15 साल से महरौनी विधानसभा पर जीत का स्वाद नहीं चख सकी है। इसके बावजूद दोनों विधानसभा सीटों पर तमाम दावेदारों की लिस्ट के बीच प्रत्याशी को लेकर रोज नई चर्चा सामने आ रही थी। रविवार को टिकट घोषित होने के बाद तमाम अटकलों पर विराम लग गया। रामरतन कुशवाहा ने पिछले विधानसभा चुनाव में तीसरा स्थान पाया था और 2007 में भाजपा का जो वोट बैंक आठ प्रतिशत तक लुढ़क गया था उसे 19 फीसदी तक पहुंचाया था। उन्हें 54,413 वोट मिले थे। वहीं मन्नू पंथ महरौनी विधानसभा पर मजबूत उम्मीदवार बनकर उभरे। उन्होंने महरौनी विधानसभा से पिछले विधानसभा चुनाव में 69,110 वोट पाए। जबकि जीत दर्ज करने वाले बसपा के फेरन लाल अहिरवार को 70,847 वोट मिले थे। मन्नू केवल 1737 वोट से चुनाव हार गए थे।
सिटिंग विधायक पर नहीं जताया भरोसा
बसपा से सदर विधायक रमेश कुशवाहा ने टिकट कटने पर भाजपा का दामन थामा। उनके राजनैतिक संरक्षक स्वामी प्रसाद मौर्या के भाजपा में आने के बाद रमेश कुशवाहा का टिकट पक्का माना जा रहा था। उम्मीद जताई जा रही थी, कि भाजपा आलाकमान बसपा छोड़कर आए रमेश कुशवाहा पर दाव आजमा सकती है। भाजपा की जिला इकाई के लोग भी रमेश कुशवाहा की टिकट को पक्का मानकर चल रहे थे।
एकजुटता पर रहेगी नजर
भाजपा के जिला संगठन पर हमेशा से गुटबाजी का आरोप लगता रहा है। इसी गुटबाजी के कारण राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का प्रस्तावित कार्यक्रम देवगढ़ में नहीं हो पाया था। गुटबाजी इतनी चरम पर है कि हर कोई अपने चहेते को प्रत्याशी बनता देखना चाह रहा था। इसीलिए जनपद में सदर विधानसभा से सबसे ज्यादा दावेदारों के नाम केवल भाजपा की सीट के लिए सामने आ रहे थे। भाजपा के दोनों घोषित प्रत्याशियों के सामने वोटरों को लुभाने के साथ ही पार्टी की अंदरूनी राजनीति पर नजर रखने की भी रहेगी।