ललितपुर। चंडी मंदिर धाम पर सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण व श्रीरुद्रमहायज्ञ आयोजन में सोमवार को श्रद्धालुओं ने 40 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। वहीं, सुबह की बेला में रुद्रमहायज्ञ में पीठ पूजन किया गया।
कथा व्यास चंद्रभूषण पाठक ने प्रभु श्रीराम की लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया। चंडीपीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि महामृत्युजंय के जप से मनुष्य के हर संकट का नाश होता है, क्योंकि महामृत्युजंय मंत्र के प्रत्येक अक्षर में भगवान भोलेनाथ का वास है। कहा कि हम भगवान शंकर की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो प्रत्येक श्वांस में हैं, जीवन में शक्ति का संचार करते हैं, जो संपूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर को भोलेनाथ की उपाधि इस कारण मिली कि वह स्वभाव से बेहद भोले हैं और वे रुद्र देवता के रूप में भी जाने जाते हैं। रुद्रदेव यदि एक बार गुस्सा हो जाएं तो प्रलय आ जाता है। लेकिन, यह शंकर का ही रूप है जो मात्र जल और बेलपत्र से प्रसन्न होकर भक्त की सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसलिए ब्रह्मांड के सभी जीव भोलेनाथ की आराधना करते हैं।
महारुद्राभिषेक पूजन प्रधान यजमान हरिशंकर साहू व सह यजमान डाॅ. अनूप श्रीवास्तव, डाॅ. रानी श्रीवास्तव, जयप्रकाश चौबे, मगनलाल सीरौठिया, गिरीश शर्मा ने किया। इस दौरान बाबा हीरानंदगिरि, पातालेश्वरगिरि, सर्वेश्वरगिरि, सरदार बीके सिंह, राजीव बबेले, संदीप तिवारी, अनूप मोदी, राहुल शुक्ला, प्रकाश नारायण श्रीवास्तव, अश्विनी पुरोहित, शत्रुघ्न यादव, लक्ष्मीनारायण साहू, संतोष साहू, संजू खरे आदि उपस्थित रहे।
छह को संत मंथन में सतुआ वाला सहित कई संत आएंगे
चंडीपीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने बताया कि छह अगस्त को होने वाले संत मंथन में कई प्रमुख संतजन आ रहे हैं, इनमें जगतगुरु संतोषानंद सतुआ बाबा भी आएंगे। उन्होंने कहा कि दोपहर में आयोजित संत मंथन में कई बिंदुओं पर चर्चा होगी। सात अगस्त को शहर में शोभायात्रा निकलेगी, जिसमें संतजन, जगतगुरु और कई महामंडलेश्वर भाग लेंगे।