पुलवारा (ललितपुर)। कस्बा बार स्थित ऐतिहासिक तिरछा मकबरा पुरातत्व विभाग की उदासीनता के कारण जर्जर होता जा रहा है। यदि हाल रहा तो इसका वजूद खतरे में पड़ जाएगा।
सोलहवीं शताब्दी में निर्मित यह मकबरा अपने आप में अद्भुत है। इसकी नक्काशी बेजोड़ है। यह मकबरा एक ओर झुका हुआ है, जिससे यह तिरछा मकबरा के नाम से प्रसिद्ध है। इसकी देखभाल की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व विभाग के पास है। विभाग ने देखभाल के लिए वर्षों पहले एक साइन बोर्ड लगा दिया और इसके बाद इसे भूल गया।
बस, इसी साइन बोर्ड के सहारे इसकी देखभाल होती है। किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण यह ऐतिहासिक विरासत धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है।
वर्षों से समाजसेवियों और ग्रामीणों द्वारा इस मकबरे की देखरेख एवं जीर्णोद्धार के लिए मांग की जा रही है, लेकिन पुरातत्व विभाग इस ओर उदासीन बना हुआ है। पिछले दिनों मकबरा पर गाज गिरने से मकबरा के चार द्वारों में से एक द्वार आधा गिर गया था तथा इसका चबूतरा भी गिर गया था। इस मकबरा की देखभाल नहीं होने के कारण इस पर बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं।
इसी मकबरे से सटा ऐतिहासिक तालाब है, जो अपने आप में काफी मनोरम है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही विभाग की नींद नहीं खुली तो वह दिन दूर नहीं, जब ऐतिहासिक एवं अद्भुत स्थलों का वजूद खत्म हो जाएगा। भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष हरपाल सिंह सिसौदिया ने पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर इस ओर ध्यान देने की मांग की है।
पत्र पर भगवत सिंह चौहान, प्रमोद पांडे, कपिल बरसैंया, आशीष सेठ कांशीराम कुशवाहा, करन सिंह मुखिया, आशीष सेन, जगदीश राजपूत, लखन कुशवाहा, ब्रजेश रावत, राजू राजा, करन सिंह राजपूत, किशन कुशवाहा, मनोज सोनी आदि के हस्ताक्षर हैं।