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कर्ज लेकर नहीं लौटा रहे बैंकों का पैसा

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ललितपुर। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं में ऋण लेने के बाद अधिकतर लोग उसे समय से वापस नहीं लौटा रहे है। इससे बैंकों में नान परफारमेंस एसेट (एनपीए) के स्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। कई बैंक मुद्रा योजना में ऋण देने से बचने लगे हैं। इसकी प्रमुख वजह यह ऋण बगैर गारंटी के दिया जाता है। सहकारी बैंक का एनपीए बढ़कर 27.07 प्रतिशत हो गया है।
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छोटे और मझोले उद्योग स्थापित करने में ऋण लेने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में बगैर गारंटी के ऋण दिया जाता है। इसमें तीन प्रकार की योजनाएं संचालित हो रही हैं। शिशु योजना में 50 हजार रुपये, किशोर योजना में 50 हजार रुपये से पांच लाख रुपये तक व तरुण योजना में पांच लाख से दस लाख रुपये तक ऋण देने का प्रावधान है। मुद्रा योजना के तहत जिले में एक अप्रैल से तीस सितंबर तक 592 लोगों को 8.59 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है, जबकि पिछले वर्ष 2459 लोगों को 31.89 करोड़ रुपये का ऋण बांटा गया था। इसी प्रकार किसानों को फसल ऋण प्रदान किया जाता है। इसमें एक अप्रैल से पंद्रह नवंबर तक 9302 दो किसानों को नए केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा 32,124 किसानों के बैंक खातों का नवीनीकरण किया गया है। इस तरह 147.36 करोड़ रुपये से अधिक (एक सौ सैंतालीस करोड़ छत्तीस लाख सैंतीस हजार रुपये) का ऋण किसानों को मुहैया कराया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना में 103 आवेदकों को 9.83 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। इस योजना में बारह लाख रुपये के ऋण पर ही अनुदान दिया जाता है।
केसीसी में किसानों को फसल तैयार होने के बाद ऋण लौटाना होता है। सात प्रतिशत ब्याज पर तीन लाख रुपये तक ऋण बांटा जाता है। यदि तय समयावधि में ऋण बैंक को वापस कर दिया जाता है तो उसे तीन प्रतिशत ब्याज की छूट का लाभ मिल जाता है। जिला सहकारी बैंक के आंकड़े पर नजर डालें तो वर्ष 2017-18 में एनपीए 26.92 प्रतिशत था, जो कि वर्ष 2018-19 में 27.07 प्रतिशत हो गया। यानी, 2657 लाख रुपये एनपीए का है। बैंक अधिकांश फसली ऋण मुहैया कराने पर जोर देता है। इसमें एक लाख रुपये के अंदर के ऋण दिए जाते हैं। बैंक का व्यवसाय बढ़ा है। वर्तमान में 94.17 करोड़ रुपये डिपोजिट है। एनपीए को 27 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत तक लाने की योजना है। बैंक के खर्चों को नियंत्रित किया गया है। पिछले वर्ष के मुकाबले अक्तूबर तक दो करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की है। वर्ष 2019-20 में 44.12 करोड़ के सापेक्ष 31 करोड़ रुपये का ऋण बांटा जा चुका है।
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किसान रहता कर्जमाफी के इंतजार में
सरकारों द्वारा कर्जमाफी जैसी योजनाएं समय-समय पर चलाई जाती हैं। इसमें किसानों को कर्ज माफ कर दिया जाता है। इससे अधिकतर किसान बैंकों का समय से ऋण नहीं लौटाते हैं। उन्हें कर्ज माफी स्कीम शुरू की उम्मीद बनी रहती है। बैंकों का एनपीए बढ़ने में एक कारण यह भी है।
यह ऋण पांच साल से भी पुराने समय से चला आ रहा है। अब एनपीए कम करने के लिए समितिवार योजना बनाई जा रही है। एनपीए को 27 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशततक लाया जाएगा।
- एमके सिंह, सचिव मुख्य कार्यपालक, जिला सहकारी बैंक
एनपीए की समीक्षा स्थानीय स्तर पर नहीं की जाती है। हालांकि, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं केसीसी के ऋण समय नहीं लौटाने की समस्या आ रही है। इससे बैंकों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
- एसके श्रीवास्तव, लीड बैंक मैनेजर
किसानों से तीन करोड़ रुपये की वसूली की जानी है। इसमें ट्रैक्टर ऋण, फसली ऋण आदि शामिल हैं। वसूली चल रही है। कुछ किसान ऐसे भी हैं, जिनके पिता अथवा अन्य परिजनों की मौत हो गई, जिससे वसूली में कठिनाई आ रही है।
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- मनोज कुमार सरोज, तहसीलदार, ललितपुर
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