मुनिश्री से आशीर्वाद लेते श्रद्धालु।
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भलाई करने वालों को ही मिलती मलाई: मुनिश्री
ललितपुर। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्रीसिद्ध चक्र महामंडल विधान चल रहा है। अष्टानका महापर्व के अंतिम दिन 1024 अर्घ्य श्री सिद्ध भगवान के पावन चरणों में समर्पित किए गए। मुनिश्री ने कहा कि भलाई करने वालों को ही मलाई मिलती है।
इसके पहले बाल ब्रह्मचारी मनोज भैया के निर्देशन में अभिषेक पूजन, सिद्ध भगवान के 1008 नामों सहित सहस्त्रनाम विधान किया गया। विश्व शांति की मंगल भावना के साथ महायज्ञ हवन कर इस अनुष्ठान का समापन हो गया। मंगल आरती करने का सौभाग्य कुबेर परिवार चक्रेश्वर झोजिया, राजेश कुमार, रूपेश कुमार झोजिया परिवार को मिला। आचार्यश्री धर्मभूषण महाराज ने कहा कि तीर्थंकरों की भक्ति उत्तम सुख देने वाली है। जो प्राणीमात्र की सुख की कामना करते हैं, वहीं तीर्थंकर बनते है। अपने लिए जिए तो क्या जिए, जो दूसरों के आंसुओं को पोछता है, वही सच्चा धर्म मात्र है। हमें दूसरों की भलाई के लिए कार्य करते रहना चाहिए। भगवान के घर भलाई करने वालों को ही मलाई मिलती है। अपनी बुराइयों की आहूति देना ही सच्चा हवन है।
उन्होंने सोमवार को होने वाले हवन कुंड में अपनी किसी एक बुराई की आहूति देने का आह्वान किया। विधान दिगंबर जैन समाज पंचायत समिति के तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है। इस विधान में उत्साही कार्यकर्ताओं व स्वयं सेवी संस्थाओं का निरंतर सहयोग मिल रहा है। विधान में बाल ब्रह्मचारी अनूप भैया एवं अन्नू भैया का सहयोग मिल रहा है।