ललितपुर। मेडिकल कॉलेज की अत्याधुनिक माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला में दो दिन पहले जांच शुरू हो गई है। इससे अब संक्रामक रोगों के मरीजों के नमूनों में संक्रमण के कारक जीवाणुओं की पहचान और उनके अनुरूप एंटीबायोटिक की संवेदनशीलता की जांच मेडिकल कॉलेज में ही हो सकेगी। ऐसी जांच के लिए पहले मरीजों को बाहर जाना पड़ता था। नई सुविधा से बीमारी का सही उपचार तय करने में मदद मिलेगी।
अब बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे नमूने
जिले में अब तक संक्रामक रोगों से संबंधित कई महत्वपूर्ण माइक्रोबायोलॉजिकल जांचों की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में मरीजों के नमूने जांच के लिए दूसरे शहरों में भेजने पड़ते थे। इससे रिपोर्ट मिलने में समय लगता था और मरीजों को समय पर उचित उपचार मिलने में परेशानी होती थी। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बाहर जांच कराना अतिरिक्त खर्च का कारण भी बनता था। अब इन्क्यूबेटर की मदद से महिलाओं को रोजाना करीब 60 जांचें निशुल्क की जा रही हैं। मूत्र, मवाद, शरीर के तरल पदार्थ, मल, रक्त, बलगम आदि के नमूनों की अलग-अलग जांच की सुविधा दी जा रही है। बांकी मरीजों के लिए जांच-शुल्क का चार्ट जल्द ही जारी किया जाएगा।
माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला शुरू होने से अब कई तरह के संक्रमणों की जांच मेडिकल कॉलेज में ही की जा सकेगी। इससे संक्रमण के कारक जीवाणु की पहचान के साथ यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि उसके उपचार के लिए कौन सी एंटीबायोटिक प्रभावी रहेगी। इससे अनावश्यक अथवा गलत एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को कम करने में सहायता मिलेगी।
सह आचार्य डॉ. देशनिधि सिंह के अनुसार, जीवाणु की पहचान और एंटीबायोटिक की संवेदनशीलता की जांच से मरीज को संक्रमण के अनुरूप उपचार देने में मदद मिलेगी। इससे उपचार को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाया जा सकेगा।
इन संक्रमणों की जांच में मिलेगी मदद
मूत्र संक्रमण
आंतों के संक्रमण
ऊतक संक्रमण
श्वसन तंत्र के संक्रमण
अन्य जीवाणुजनित संक्रमण
किस जांच की रिपोर्ट कब मिलेगी?
जांच
रिपोर्ट का समय
कल्चर एवं सेंसिटिविटी 48 से 72 घंटे
पारंपरिक ब्लड कल्चर
3 से 7 दिन
ग्राम स्टेन
3 से 6 घंटे
एएफबी स्टेन
3 से 6 घंटे
इंडिया इंक
3 से 6 घंटे
अल्बर्ट स्टेन
30 से 60 मिनट
स्टूल परीक्षण (आरआईएम) 2 से 6 घंटे
फंगल स्टेन
3 से 6 घंटे
फंगल कल्चर
7 दिन या अधिक
स्लिट स्किन स्मीयर 1 से 2 दिन
जांच के लिए जरूरी
- नमूने जीवाणुरहित कंटेनर में भेजना जरूरी।
- अनुरोध फॉर्म पर मरीज का प्रासंगिक चिकित्सकीय इतिहास दर्ज करना होगा।
- फॉर्म में किस जांच की आवश्यकता है, इसका स्पष्ट उल्लेख जरूरी।