नोटबंदी के बाद भी सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में कैशलेस की सुविधा नहीं है। इस कारण टैक्स, पंजीकरण आदि कार्यों में नकद भुगतान करना पड़ रहा है। यहां तक कि चालान प्रक्रिया में भी वाहन चालकों को नकद भुगतान की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। नकदी में उत्पन्न हुई समस्या के चलते एआरटीओ द्वारा कैशलेस सुविधा के लिए ट्रेजरी से पत्राचार शुरू किया है।
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में करीब पांच हजार प्राइवेट चार पहिया वाहन, 280 सरकारी चार पहिया वाहन, 19 हजार ऑटो-टैक्सी, एक हजार ट्रक और 1.06 लाख दो पहिया वाहनों समेत करीब 1.30 लाख वाहन पंजीकृत हैं। जबकि आए दिन दर्जनों नये वाहनों के पंजीकरण भी हो रहे हैं। हर प्रकार के वाहनों का रजिस्ट्रेशन, वाहनों पर लगने वाला टैक्स, जुर्माना, चालान, ड्राइविंग लाइसेंस फीस आदि कार्य विभिन्न अलग-अलग पटलों पर किए जाते हैं। सभी पटलों पर अलग-अलग वाहन संबंधी कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया नकद ही होती है। इन विभिन्न पटलों से विभाग द्वारा हर माह करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। वाहनों के पंजीकरण से लेकर टैक्स व चालान प्रक्रिया सभी पर वसूली जाने वाली राशि के लिए एआरटीओ विभाग में चेक या अन्य कैशलेस की सुविधा मान्य नहीं कर नगद भुगतान ही लिए जाने का प्रावधान किया गया है। यहां तक कि चेक से भी भुगतान नहीं लिया जाता है। ऐसे में उन वाहन स्वामियों व चालकों को यह राशि नगद में ही जमा करनी होती है। लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा कैशलैस भुगतान प्रणाली का बढ़ावा दिए जाने के लिए बैंकों से नगद राशि निकालने में भी लिमिट तय कर दी है। इससे वाहन स्वामियों व चालकों को एआरटीओ कार्यालय में किया जाने वाला भुगतान करने में भी परेशानी हो रही है। विभागीय अधिकारियों व कर्मियों के अनुुसार नोटबंदी के दौर में बैंक से नगद राशि नहीं निकलने के चलते इसका प्रभाव टैक्स वसूली में साफ देखा गया है। जबकि इससे पूर्व नवंबर माह यह विभाग द्वारा 1.86 करोड़ रुपये टैक्स की वसूली की गई थी। हालांकि विभाग द्वारा कैशलैस प्रणाली अपनाने के लिए आला अधिकारियों व ट्रेजरी अधिकारियों से पत्राचार की शुरुआती प्रक्रिया की है। लेकिन इसके लिए कई प्रक्रियाओं में बदलाव भी होने के साथ ही विभाग में पारदर्शिता भी आ सकेगी।
एआरटीओ कार्यालय में किसी भी प्रकार भुगतान फिलहाल नगद भुगतान ही लिया जा रहा है। कैशलैस व चेक से भुगतान की प्रक्रिया अपनाने के लिए ट्रेजरी से पत्राचार किया गया है, उक्त प्रक्रिया लागू होने में समय लग सकता है।
सोमलता यादव, एआरटीओ, प्रवर्तन।