ललितपुर। जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र जैन मयूर ने कहा कि सरकार द्वारा पारित किए गए दो आर्डीनेंस में तमाम विसंगतियां हैं। इससे व्यापारियों का उत्पीड़न व इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा। मंडी के अंदर और बाहर शुल्क में छूट देना बहुत बड़ी असमानता है। उन्होंने गल्ला मंडी के अंदर भी शुल्क समाप्त करने की मांग की है।
इलाइट चौराहा स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ऑर्डीनेंस पारित होने से किसानों के साथ खेती में अनुबंध हो सकेंगे। इस दौरान ऐसा कोई एग्रीमेंट नहीं होगा, जिसमें किसानों को कोई नुकसान हो, साथ ही किसान पर एग्रीमेंट के विरुद्घ कार्य करने पर कोई कार्रवाई का प्राविधान नहीं रखा गया है। बीमा लाभ भी अनुबंध के आधार पर तय होगा। किसी व्यक्ति या व्यापारी जिसके पास पेन कार्ड है या कोई डाक्यूमेंट है, जो केंद्र सरकार नोटीफाइड करेगी, उस पर राज्यीय या अंतर्राज्यीय व्यापार कर सकते हैं, जिसमें फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन या कृषि उत्पादन समूह व कृषि सहकारी समिति शामिल हैं। यदि कोई व्यापारी इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो कम से कम पच्चीस हजार रुपये से पांच लाख रुपये तक जुर्माना कर सकती है। इसके अलावा पांच हजार रुपये प्रतिदिन की पैनाल्टी लगा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी इलैक्ट्रानिक ट्रेडिंग में उल्लंघन करता है तो पेनाल्टी पचास हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक होगी। जो व्यापारी इस आर्डीनेंस के तहत व्यापार करना चाहते हैं, उनके द्वारा एक करोड़ रुपये से लेकर ऊपर बैंक निकासी पर सेक्शन 194 एन आयकर अधिनियम के हित दो प्रतिशत टीडीएस काटा जाएगा। दोनों आर्डीनेंस से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि भविष्य में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा समाप्त होगी। मंडी के अंदर ईमानदार व्यापारियों के साथ अन्याय होगा, उन्हें 2.5 प्रतिशत मंडी शुल्क एवं विकास शुल्क के रूप में देकर व्यापारियों एवं मंडी समितियों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। मांग की गई कि देश की गल्ला मंडियों में मंडी शुल्क को पूर्ण समाप्त किया जाए।
इस मौके पर जिलाध्यक्ष प्रदीप त्रिपाठी, अनिल अंचल, अभय जैन, राजेंद्र जैन, संजीव, नितिन अग्रवाल, अशोक अनौरा आदि उपस्थित रहे।