ललितपुर। शून्य से पांच वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों के कुपोषण के
चिह्नांकन को वृहद अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान सात व दस सितंबर को
आंगनबाड़ी केंद्रों पर वजन दिवस मनाया जाएगा, जिसमें बच्चों का वजन लेकर
उनकी पोषण श्रेणी निर्धारित की जाएगी।
रैपिड सर्वे आन चिल्ड्रेन - 2013
की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में 9.4 प्रतिशत बच्चे अतिकुपोषित
हैं। इस डाटा के आधार पर प्रदेश में करीब तेइस लाख बच्चों के अतिकुपोषित
होने का अनुमान है। लेकिन, राज्य पोषण मिशन की वेबसाइट पर मात्र एक लाख
अट्ठावन हजार बच्चे अतिकुपोषित हैं। आंकड़ों की समीक्षा में पाया गया कि 75
प्रतिशत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने अतिकुपोषित बच्चों का चिह्नांकन नहीं
किया है। इस पर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने शून्य से पांच वर्ष तक
की आयु के बच्चों में कुपोषण के चिह्नांकन के लिए वृहद अभियान चलाने के
निर्देश दिए हैं। यह अभियान दो चरणों में चलाया जाएगा।
सात व दस
सितंबर को प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की देखरेख में वजन दिवस मनाया
जाएगा। वजन दिवस पर सुबह आठ बजे से आंगनबाड़ी केंद्र पर लाए गए सभी बच्चों
का वजन लिया जाएगा। प्रथम एवं द्वितीय चरण में छूटे बच्चों का वजन लेने के
लिए ग्यारह अथवा चौदह सितंबर को वजन दिवस आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी
बच्चों का वजन चौदह सितंबर तक पूर्ण कर लेने के निर्देश दिए हैं।
इधर,
जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने निर्देशों के अनुपालन में संबंधित विभागों के
अफसरों के साथ की और वजन दिवस के संबंध में निर्देशित किया है। जिला
कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र
तक लाने में ग्राम प्रधान, जनप्रतिनिधि, आशा, आंगनबाड़ी सहायिका, युवा मंगल
दल और मातृ समिति के सदस्य सहयोग करेंगे। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर
बच्चों का वजन लेने के पश्चात वजन तालिका का प्रयोग करते हुए पोषण श्रेणी
निर्धारित की जाएगी।
वजन तालिका ग्रोथ चार्ट का विकल्प है, जिसके आधार पर
बच्चे की आयु व वजन की जानकारी ली जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों पर शून्य से
पांच वर्ष के बच्चों की पूर्ण सूची बनाई जाएगी तत्पश्चात केंद्रवार,
ग्रामवार, वार्डवार, ब्लाकवार संकलित संख्या को निर्धारित प्रारूप पर
जिलाधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा। अतिकुपोषित बच्चों के रजिस्टर को लाल
रजिस्टर कहा जाएगा, जिसके बाद उनके कुपोषण के निवारण का प्रयास किया जाएगा।
यदि आगामी माहों में नए अतिकुपोषित बच्चों का चिह्नांकन होता है तो उसे भी
लाल रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।