ललितपुर। बजाज पावर प्लांट से 160 व सोलर प्लांट से 22 से 25 मेगावाट का भरपूर बिजली उत्पादन होने के बाद भी जनपदवासी बिजली के लिए तरस रहे हैं। जनपद से उत्पादित बिजली से अन्य जनपद रोशन किए जा रहे हैं, लेकिन यहां रोस्टिंग, इमरजेंसी रोस्टिंग या फिर अन्य कारणों से बिजली गुल कर परेशान किया जा रहा है।
बजाज पावर प्लांट व सोलर पावर प्लांट से उत्पादित बिजली रोंड़ा हाइडिल से जनपद के 12 विद्युत सब स्टेशनों में स्थापित विभिन्न शहरी व ग्रामीण फीडरों के माध्यम से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाती है। बजाज पावर प्लांट से 160 मेगावाट बिजली कल्यानपुरा 220 केवी सब स्टेशन के माध्यम से रोंड़ा हाइडिल को उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि चीरा और महरौनी खुर्द में जैक्शन, रेफीक्स व समाविष्ट सोलर पावर प्लांट से उत्पादित 20 से 22 मेगवाट की बिजली रोंड़ा हाइडिल से जनपद को रोशन करने के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। इस प्रकार जनपद को रोशन करने के लिए करीब 180 मेगावाट से अधिक बिजली उपलब्ध हो रही है। यहां स्थापित ट्रांसफार्मरों से पूर्व लगी सीटी की क्षमता उतनी नहीं होने के चलते उपलब्ध आपूर्ति में से मुश्किल से 120 मेगावाट बिजली ही जनपदवासियों को उपलब्ध हो पाती है।
बजाज पावर प्लांट से उत्पादन बंद होने के चलते पारीछा थर्मल पावर प्लांट से जनपद को मात्र 400 एंपियर यानी 80 मेगावाट तक ही बिजली उपलब्ध कराई जाती है, हालांकि ओवरलोड होने और ट्रांसफार्मरों की क्षमता के अनुरूप ट्रांसमिशन द्वारा 70 मेगावाट बिजली ही जनपदवासियों को मिल पाती है।
बजाज प्लांट से उत्पादित बिजली रोंड़ा सब स्टेशन में स्थापित 66 केवी लाइन के 20 एमवीए ट्रांसफार्मर के माध्यम से जनपद में स्थित 66 केवी गल्ला मंडी सब स्टेशन, माताटीला, तालबेहट को आपूर्ति की जा रही है। जबकि रोंड़ा में 40 एमवीए प्रथम के ट्रांसफार्मर से गल्ला मंडी 33 केवी, जाखलौन, पंप केनाल, जिला अस्पताल और बजाज पावर प्लांट को बिजली मुहैया कराई जाती है।
इसी प्रकार रोंड़ा से 40 एमवीए के द्वितीय ट्रांसफार्मर से दिन में सोलर प्लांट की बिजली से बिरधा, बाइपास और बांसी के लिए सौर ऊर्जा की बिजली मुहैया कराई जाती है। जबकि महरौनी स्थित 132 केवी सब स्टेशन से महरौनी, मड़ावरा, बानपुर, सोजना को बिजली दी जाती है। वहीं इस दौरान यदि रोस्टर या फिर अन्य कारणों के चलते रोंड़ा हाइडिल से बिजली बंद हो जाती है, तो ऐसी दशा में सोलर प्लांट व बजाज प्लांट से उत्पादित बिजली को अन्य जनपदों में पहुंचा दिया जाता है। जबकि जनपद में उतने समय तक बिजली गुल बनी रहती है। वहीं इमरजेंसी रोस्टिंग का भी कोई नियम नहीं रह गया है, पनकी कंट्रोल द्वारा कभी भी इमरजेंसी में रोस्टिंग कर दी जाती है। ऐसे में जनपद में भरपूर बिजली उत्पादन होने के बाद भी जनपदवासियों को घंटों बिजली गुल रहने से परेशान होना पड़ रहा है।
हर दिन 90 मेगावाट की है जरूरत
पूरे जनपद में 12 विद्युत सब स्टेशनों के अंतर्गत करीब 70 हजार उपभोक्ताओं द्वारा बिजली का उपभोग किया जा रहा है। जबकि करीब तीस हजार उपभोक्ताओं के कनेक्शन राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत किए जा रहे हैं। जनपद में रोंड़ा हाइडिल पर बिजली की डिमांड करीब 90 मेेगावाट है। बजाज पावर प्लांट के माध्यम से 400-400 एंपियर यानी 80-80 मेगावाट बिजली 132 केवी के दो सर्किट के माध्यम से रोंड़ा हाइडिल का उपलब्ध कराई जा रही है। 80 मेगावाट बिजली ललितपुर को और 80 मेगावाट बिजली हंसारी के माध्यम से झांसी जनपद को दी जा रही है। वहीं तीन सोलर प्लांट से भी रोंड़ा हाइडिल को दिन में 20 से 22 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो जाती है। लेकिन रात के समय उपलब्धता नहीं होती है।
बजाज से बिजली मिलने पर भी रोस्टिंग जारी
पूर्व में पनकी कंट्रोल द्वारा बजाज पावर प्लांट से बिजली मिलने पर जारी किया जाने वाला रोस्टर जनपद में लागू नहीं होने के आदेश जारी किए गए थे। लेकिन अब जब बजाज पावर प्लांट से जनपद को एक बार फिर से बिजली मिलना शुरु हो गई है, इसके बाद भी लगातार रोस्टर के अनुसार बिजली कटौती की जा रही है। वहीं कई बार तो इमरजेंसी रोस्टिंग भी कर दी जाती है। ऐसे में जनपद में प्रदेश शासन की मंशा और बजाज प्लांट से बिजली मिलने के बाद भी लगातार रोस्टर के अनुसार बिजली कटौती हो रही है।