संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। टीईटी अनिवार्यता को लेकर रविवार को अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की बैठक हुई। इसमें कोर्ट के निर्णय के बाद शिक्षकों के बीच उत्पन्न हुई स्थिति पर विचार विमर्श किया गया।
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की बैठक रविवार को बीआरसी जखौरा कार्यालय के सभागार में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद निरंजन की अध्यक्षता में हुई। बैठक में शिक्षक संगठन एससी/एसटी बेसिक टीचर वेलफेयर एसोसिएशन, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, अटेवा के जनपदस्तरीय पदाधिकारी मौजूद रहे। इसमें उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद सभी शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता के बाद उत्पन्न स्थिति पर विचार विमर्श किया गया।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि उच्चस्तरीय अधिवक्ताओं से संपर्क कर टीईटी अनिवार्यता को समाप्त करने की रणनीति बनाई जा रही है। उन्होंने संगठन की ओर से आगामी रणनीति के लिए शिक्षकों को तैयार रहने का आह्वान किया। बैठक में एससी/एसटी बेसिक टीचर वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष श्याम बिहारी, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मुहम्मद मुनीर, टीएससीटी के जिला संयोजक आदर्श रावत, अटेवा जिलाध्यक्ष रामेंद्र सिंह ने भी अपने विचार रखे।
बैठक में प्रथम चरण में शिक्षक की पाती के नाम से अभियान 09 मार्च से 15 मार्च तक चलाकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, प्रदेश के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष व केंद्र सरकार को ई-मेल/ पोस्टकार्ड भेजा जाएगा। दूसरे चरण में 13 अप्रैल को जनपद मुख्यालय पर एक जगह एकत्र होकर मुख्य मार्ग पर शाम के समय मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
तीसरे चरण में 3 मई को प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इको गार्डन पार्क में धरना प्रदर्शन रैली करते हुए विधानसभा तक मार्च करने की रणनीति बनाई गई। इसके बाद भी सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो चौथे चरण में मानसून सत्र में शिक्षक मिलकर संसद भवन का घेराव करेंगे। बैठक के दौरान अनिल त्रिपाठी, सत्येंद्र जैन, लखन लाल सेन, हरिश्चंद्र नामदेव, संजीव टडैया, हरिनारायण चौबे, इंदर सिंह पटेल, रामरक्षपाल सिंह आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।