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जनपद में नहीं है फसलों में किसी भी प्रकर के कीड़े लगने का भय

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ललितपुर। राजस्थान के कई जिलों में टिड्डी का प्रकोप फैल चुका है। उप्र में भी इनके हमले की आशंका से किसान चिंतित हैं। कृषि विभाग इसके लिए अलर्ट हो गया है। किसानों ने भी तैयारी कर ली है।
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पिछले दिनों हुई बरसात के बाद अब कुछ दिनों से अच्छी खासी धूप निकल रही है, जिससे अन्य प्रदेशों में टिड्डी का प्रकोप बढ़ रहा है। यह टिड्डी रबी की फसलों को पूरी तरह से नष्ट कर देती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और गुजरात में हाई अलर्ट घोषित है। बुंदेलखंड में ललितपुर समेत अनेय जिलों में भी संभावित हमले को लेकर कृषि विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। लेकिन, अभी तक जिले में टिड्डी का कोई असर नहीँ है। लेकिन, किसानों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मटर की फसल में माहूं लगने का भय लग रहा था, लेकिन अब फसलें पूरी तरह से ठीक हैं। किसी भी प्रकार के रोग व कीड़े लगने का भय नहीं है। फिर भी टिड्डी के हमले का डर है, इसलिए तैयारी कर रहे हैं।
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- विशाल यादव, ग्राम उल्दना
गेंहू व अन्य दलहनी फसलें वर्तमान में ठीक हैं। सर्दी से मटर की फसल को नुकसान होने का खतरा था, लेकिन धूप निकलने से ठीक हो गई है। अब टिड्डी का डर लग रहा है।
- हनुमत सिंह, ग्राम रखवारा
दलहनी फसलों में अधिक रोग लगने का भय रहता है, लेकिन दिन में पड़ रही तेज धूप व रात्रि में सर्दी पड़ने से किसी भी प्रकार के रोग लगने का खतरा नहीं रहा है। फसल ठीक है, पर टिड्डी का खतरा मंडरा रहा है। उसके लिए तैयार हैं।
- हरीराम पटेल, बुदनी
वर्तमान में फसलों में कोई कीड़े नहीं लग रहे हैं। अभी फसलों में अच्छी फलियां आ रही हैं। किसी भी रोग का भय नहीं रहा है, लेकिन सुना है कि टिड्डी हमला बोल सकती हैं। इसलिए खतरा है।
- बच्चू कुशवाहा, ग्राम बिगाई
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जनपद में फसलों में टिड्डी के हमले का अभी कोई खतरा नहीं है। लेकिन, टिड्डी से निपटने की तैयारियां पूरी हैं। किसानों को बता दिया गया है कि टिड्डी को कैसे भगाएंगे। दवा के बारे में भी जानकारी दे दी गई है।
- गौरव यादव
जिला कृषि अधिकारी
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ऐसे करें बचाव
टिड्डी को भगाने एवं नियंत्रित करने के लिए थालियां, ढोल, नगाड़े, लाउडस्पीकर या अन्य माध्यमों से शोर गुल करना चाहिए, क्योंकि यह शोर सुनकर भाग जाती हैं। टिड्डी दल सुबह 10 बजे के आद अपना डेरा बदलता है। इसलिए इसे आगे बढने से रोकने के लिए क्लोरोपाइरिफास 20 प्रतिशत ईसी की एक लीटर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से फसल पर छिड़काव करना चाहिए। नीम के तेल की 40 एमएल मात्रा को 10 ग्राम कपडे धोने के पाउडर के साथ मिलाकर टंकी के पानी में डालकर छिड़काव करने से टिड्डी फसलों को नहीं खा पाती हैं।
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