ललितपुर। जिला बार एसोसिएशन सभागार में बुधवार को अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता दिवस उत्साह के साथ मनाया। अधिवक्ताओं ने प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को याद किया और गोष्ठी में अपने विचार रखे।
जिला बार भवन में बुधवार को अधिवक्ता दिवस मनाया गया। अधिवक्ताओं ने विधि और न्याय के संरक्षण में अपनी भूमिका को सर्वोपरि बताया। अधिवक्ता अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अधिवक्ता केवल वाद प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ होता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने व्यक्तित्व से यह सिद्ध किया था कि सत्य विधि और मानवता का सम्मान अधिवक्ता का धर्म है। आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम न्याय की रक्षा के लिए ईमानदारी, निष्ठा और साहस के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोकीनाथ बिलगैंया ने कहा कि न्यायालय में वकालत केवल पेशा नहीं है बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है। अधिवक्ता न्यायपालिका और आम जनता के बीच सेतु का कार्य करता है। ऐसे में हमें वकालत के स्तर को उच्च बनाते हुए विधि प्रक्रिया को सरल, निष्पक्ष और सुलभ बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
अधिवक्ता जय कुमार चौधरी ने कहा कि आज का दिन हमें याद दिलाता है कि अधिवक्ता केवल मुकदमों की लड़ाई नहीं लड़ते बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास जगाने का कार्य करते हैं। समाज का एक बड़ा वर्ग न्यायालय तक तभी पहुंचता है, जब उसके साथ अन्याय होता है। ऐसे में अधिवक्ता उम्मीद की पहली आवाज और संविधान की पहली ढाल होता है।
अधिवक्ता जानकी प्रसाद बौद्ध ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन संदेश देता है कि वकील की आवाज तक तब प्रभावशाली नहीं हो सकती, जब तक उसमें सत्य और अध्ययन की शक्ति न हो। मौके पर जीवनधर लाल जैन, अशोक रिछारिया, मनोहर सिंह ठाकुर, बृजेंद्र सिंह यादव, अंकित जैन, प़ुष्पेंद्र सिंह चौहान, शेर सिंह यादव,अनुराग लोधी, चंद्रप्रकाश संज्ञा आदि उपस्थित रहे।