नगर के मुख्य मार्गों और बाजारों में पसरे अतिक्रमण पर दूसरे दिन भी जेसीबी कहर बनकर टूटी। अभियान के दौरान प्रशासनिक अफसरों को व्यापारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। व्यापारी नेता बिना किसी भेदभाव के अतिक्रमण हटाओ अभियान पर जोर दे रहे थे। जब पक्का अतिक्रमण हटना आरंभ हुआ तब जाकर व्यापारी शांत हुए।
नगर पालिका परिषद नगर को संवारने के लिए हर साल लाखों रुपये खर्च कर रही है। इसके बाद भी शहर किसी कस्बे की माफिक लगता है। इसकी वजह कच्चा-पक्का अतिक्रमण मार्गों व बाजारों में होना है। लंबे समय से अतिक्रमण हटाओ अभियान की जरूरत महसूस की जा रही थी। शासन ने दिलचस्पी दिखाते हुए अफसरों को अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश दिए। जिस पर प्रशासनिक अमला को अतिक्रमण हटाने की रणनीति बनानी पड़ी। इस अभियान के दूसरे दिन गेंदालाल पेट्रोल पंप से सावरकर चौक तक अतिक्रमण हटाया गया। इस दौरान प्रशासनिक दल को दुकानदारों के विरोध का सामना करना पड़ा। कई दुकानदार मुंह देखी अतिक्रमण हटाने की शिकायत कर रहे थे। देखते ही देखते दुकानदारों की भीड़ जमा हो गई। आखिरकार जेसीबी का पंजा पक्के निर्माण पर चलने लगा तब जाकर दुकानदार शांत हुए। इस तरह शाम तक अतिक्रमण हटाने का सिलसिला चलता रहा। अतिक्रमण हटाओ अभियान में एसडीएम सदर रमेशचंद्र, सीओ हिमांशु गौरव, नगर पालिका ईओ राकेश कुमार सहित पुलिस बल साथ रहा।
दुुकानदारों ने हटा लिए टीन टप्पर
अतिक्रमण हटाओ के दौरान तमाम दुकानदारों ने नुकसान से बचने के लिए खुद ही दुकानों पर लगे टीन टप्पर हटा लिए तो कइयों ने नाली पर रखे पत्थर हटा लिए। लेकिन, कई जगह पक्के निर्माण से प्रशासनिक अमला ने नजरें फेर ली। ऐसे में दुकानदारों में आक्रोश फूट पड़ा।
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प्रभावित हुए फुटपाथी दुकानदार
इस अभियान में सबसे ज्यादा फुटपाथी दुकानदार, ठेले वाले, सब्जी वाले प्रभावित हो रहे हैं। उनका स्थल छिन जाने से रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है।
अब क्या होगा?
फुटपाथी दुकानदारों ने अपनी दुकाने समेट ली हैं लेकिन अब कहां रोजगार करेंगे? जिसका जवाब किसी के पास नहीं है। यही वजह है कि अभियान थमते ही फुटपाथी अपने वापस स्थलों पर लौटने लगते हैं।