प्रदेश के केबिनेट कृषि मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री शनिवार को जिले के अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। प्रदेश का सबसे पिछड़ा जिला होने के कारण यहां पेयजल, सिंचाई समेत कई समस्याएं हैं। जिले के किसान पिछले तीन सालों से अतिवृष्टि और ओलावृष्टि की मार झेल रहे हैं। इस कारण पिछले साल अखिलेश यादव की सरकार ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करते हुए मुआवजा भेजा था। जिले के अधिकारियों की लापरवाही के चलते इस राशि का वितरण नहीं हो सका और सरकार बदलते ही इसे वापस भेज दिया गया।
सूखा राहत चेक में बंदरबांट
महरौनी तहसील में सूखा राहत चेक के मामले में जमकर धांधली बरती गई। अधिकारियों की मिलीभगत से भूमिहीन किसानों को रेवड़ियों की तरह रुपये बांट दिए गए, जबकि असली लाभार्थियों को कोई भी लाभ नहीं मिल सका। मामला खुलने पर पता चला की मुख्यालय से तीन चेकबुक ही गायब हो चुकी हैं। इनकी चेकों पर कटिंग कर बैंकों में प्रस्तुत किया गया। मामला खुलने के बाद इसकी जांच शुरू की गई। लेकिन दो महीने बाद भी इसकी जांच पूरी नहीं हो पाई है। हर बार जांच के नाम पर तारीख आगे बढ़ाई जा रही है।
कहीं का रुपया कहीं लगाया
नगरीय पेयजल योजना के तहत एक साल पहले हैंडपंप और नलकूप के रीबोर व निर्माण के लिए आया रुपया जल निगम ने अनुपयोगी सामान की खरीद में खर्च कर दिया। गौरतलब है कि इसकी अनुमति डीएम द्वारा भी दे दी गई। जल निगम ने अनावश्यक रूप से एअर ब्लोअर की खरीद कर 60 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया। जबकि तीनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पहले से ही बैकवाश सिस्टम लगा हुआ है। इसी तरह इन रुपयों से तालबेहट में नलकूप का रीबोर करवाकर पाइप लाइन से जोड़ने पर भी खर्च किए गए। जबकि वहां पहले से ही पाइप लाइन डली हुई है। इसकी जांच एसडीएम द्वारा की जा रही है।
चकबंदी से परेशान किसान
जिले में चकबंदी प्रक्रिया में धांधली बरती जा रही है। इसके लिए किसान कई बार कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर चुके हैं। नाराहट गांव के किसानों ने कई बार प्रदर्शन कर फिर से चकबंदी करवाने की मांग की। उन्होंने चकबंदी अधिकारियों पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। इसी तरह अन्य गांव के किसान भी चकबंदी में धांधली का आरोप लगा चुके हैं।
बीमा राशि का नहीं मिला लाभ
कई गांव के किसानों को अभी तक बीमा राशि का भुगतान नहीं मिला है। ज्ञापन देने आने वाले किसान लेखपालों पर आरोप लगाते हुए बताते हैं कि आसपास के गांवों मे मुआवजा मिल चुका है जबकि हमारे गांवों में अभी तक मुआवजा नहीं मिला। जबकि सभी गांवों के किसानों की फसलें बराबर नष्ट हुई थीं।
मुआवजे के लिए भटक रहे किसान
जिले में तीन बांधों का निर्माण हो जाने के बाद भी अभी तक किसानों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला है। इससे किसान परेशान हैं। जिले के कचरौंदा, जमड़ार और उटारी बांध का निर्माण होने के बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। किसान परेशान होकर जिला मुख्यालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
क्रय केंद्रों पर अनियमितताएं
जिले के गेहूं क्रय केंद्रों पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। शिकायत मिलने पर अभी तक तीन क्रय केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। कई क्रय केंद्र अभी भी बंद पड़े हैं, जहां किसानों की खरीद नहीं की जा रही है। इस कारण किसानों को मजबूर होकर अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचनी पड़ रही है। इसके अलावा कई क्रय केंद्रों पर किसानों से बसूली की शिकायतें भी आ रही हैं।
बंद पड़ी हैं मंडियां
बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए ग्रामीण अवस्थापना केंद्रों में भी ताले लगे हुए हैं। जिले में बारह केंद्रों की स्थापना की गई है। अभी तक एक भी मंडी के ताले नहीं खुल पाए हैं। इस कारण किसानों को मजबूर होकर जिला मुख्यालय अपनी फसल बेचने आना पड़ता है।