फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रशासन ने गरीबों से मुंह फेरा

Thu, 03 Sep 2015 11:41 PM IST
ललितपुर ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
ललितपुर। कांशीराम आवास कालोनियों में रहने वाले लोग बूंद- बूंद पानी के लिए परेशान हैं। यहां बनी टंकियों में पानी नहीं चढ़ाया जा रहा है। जलापूर्ति की जिम्मेदारी जल निगम के अफसरों के पास है, लेकिन अफसरों की उदासीनता के कारण गरीबों की समस्या की ओर देखने की फुर्सत किसी को नहीं है। पानी की टंकी बनाकर पैसे को पानी की तरह बहाना जल निगम के अफसरों से अच्छा कोई नहीं जानता है।

मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में नगर के  छह स्थानों पर मान्यवर कांशीराम आवास कालोनियों का निर्माण किया गया। इन कालोनियों  में दो हजार से अधिक गरीब लोग निवास कर रहे हैं। कालोनी के लोगों तक पानी  पहुंचाने के लिए लाखों रुपए की लागत से पानी की टंकियों का निर्माण किया गया। चार मंजिला कालोनी में पानी चढ़ाने के लिए पास में ही टंकियां निर्मित की गईं, लेकिन मानकों को ताक पर रखकर बनाई गई इन टंकियों में मनमानी की गई।
विज्ञापन

खिरकापुरा स्थित कालोनी के लोगों तक पानी पहुंचाने के लिए 20 किलोलीटर  की टंकी का निर्माण किया गया। इसमें सात लाख रुपए से अधिक धनराशि खर्च की गई।  वहीं, नारायणपुरा कालोनी की छह लाख रुपए से निर्मित टंकी तीन साल बाद बनकर तैयार  हुई है। इन दोनों टंकियों में पानी नहीं चढ़ाया जाता है।

 नीचे तल के लोगों  को सीधे कनेक्शन दे दिए गए हैं, जिससे ऊपर पानी नहीं चढ़ता है। यही हाल  15-15 लाख रुपए से निर्मित गोविंद नगर कालोनी व सुरई घाट कालोनियों में बनी  टंकियों का है। इन टंकियों में तो लंबे समय से पानी नहीं पहुंचाया गया है। हालांकि,  सुरईघाट कालोनी में लंबे समय से चले आ रहे लीकेज को दूर करके एक दिन पहले  ही पानी की टंकी भरी गई है। इसके लिए मुहल्लेवासियों को महीनों चक्कर लगाने  पड़े। यही हाल अन्य कालोनियों में बनी टंकियों का है।
लाखों रुपए से  टंकियों का निर्माण करने के बाद रखरखाव और जलापूर्ति की जिम्मेदारी एक ऑपरेटर पर  छोड़ दी जाती है। आपरेटर जलापूर्ति सुचारु नहीं करते हैं और इसका खामियाजा मुहल्लेवासियों को भुगतना पड़ता है।


खराब गुणवत्ता के कारण नहीं र्हुइं हैंडओवर
पानी की छह टंकियों का निर्माण जल निगम की सिविल शाखा ने किया। टंकी को भरने के  लिए बोरिंग कराने की जिम्मेदारी यांत्रिकी शाखा की रहती है। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि निर्माण होने के तीन साल बाद भी जल  संस्थान के इंजीनियरों ने इन्हें हैंडओवर नहीं किया है। जानकारों के अनुसार खराब गुणवत्ता के कारण इन्हें हैंडओवर नहीं किया गया। इसको लेकर कई बार प्रशासनिक स्तर से  दबाव भी बनाया गया, लेकिन मौके पर जब सर्वे हुआ तो कई खामियां पाई गईं, इसके चलते टंकियां हैंडओवर नहीं हो सकी हैं।


सफेद हाथी बनी पुलिस लाइन की टंकी
ललितपुर।  जल निगम झांसी की कार्यदायी संस्था सीएडंडीएस द्वारा पुलिस लाइन में बनाई गई टंकी भी शोपीस बनी हुई है। इस टंकी के पास भी बोरिंग  नहीं कराई गई। ऐसी स्थिति में इस टंकी को भरा जाना ही असंभव है। जल  संस्थान के एई वीके श्रीवास्तव की मानें तो पुलिस लाइन टंकी सहित अन्य  टंकियों के निर्माण एवं पाइप लाइन में इतनी खामियां हैं कि इनको हैंडओवर  करके जनता के कोप का कोई भागीदार नहीं बनना चाहता है।


अलग-अलग दी गई जिम्मेदारियां
पेयजलापूर्ति व मेंटीनेंस की जिम्मेदारी जल निगम की सिविल व यांत्रिकी शाखा के अवर अभियंता व  सहायक अभियंता को दी गई। लेकिन, उक्त अफसर कालोनियों या अन्य स्थानों पर बनी टंकियों की दशा को देखने नहीं जाते हैं। अफसरों की लापरवाही का खामियाजा गरीब भुगतते चले आ रहे हैं।
विज्ञापन



---इनका कहना है---
कालोनियों  में बनी टंकियों की कमियां दूर करके पेयजलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। हर  हाल में कांशीराम आवास कालोनी के गरीबों को पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। जल संचालन करने के बाद ही हैंडओवर का काम होगा।
-लालजीत, परियोजना निदेशक जल निगम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें