ललितपुर। जिले को साफ सुथरा बनाने का जिम्मा उठाने वाले अधिकारी अपने आसपास ही सफाई नहीं रख पा रहे हैं। इसकी बानगी विकास भवन व नपा कार्यालय है। जहां विकास भवन के पीछे तो नगर पालिका परिषद के तलघर में गंदगी फैली है। इससे प्रतीत होता है कि अधिकारियों को साफ-सफाई से ज्यादा मतलब नहीं है, वह केवल सरकार के चलाए जा रहे अभियान तक सीमित बने हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत लाखों रुपये प्रचार एवं सफाई उपकरणों को खरीदने पर खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन, साफ-सफाई कहीं नजर ही नहीं आ रही है। योजनांतर्गत सफाई के नाम पर महज रस्म अदायगी हो रही है। इसका ताजा उदाहरण विकास भवन और नगर पालिका परिषद कार्यालय है। दोनों ही विभागों के अधिकारी सफाई के लिए सीधे जिम्मेदार हैं, इसके बाद भी सफाई का हाल किसी से छिपा नहीं है। जहां विकास भवन के पीछे कूढे का ढेर लगा है तो नगर पालिका परिषद कार्यालय का बेसमेंट अघोषित मूत्रालय में तब्दील हो गया है। जिसे विभागीय अधिकारी जानकर भी अनजान बने हैं। यदि बाजारों पर नजर डालें तो डा. भीमराव अंबेडकर काम्प्लेक्स का बुरा हाल है। यहां स्वामी विवेकानंद पार्क की दीवाल से सटकर कूड़ा डाला जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि जिस जगह कूड़ा डाला जा रहा है, वह कूड़ाघर नहीं है। इसके बाद भी बाजार में फैल रही गंदगी की नियमित सफाई नहीं की जा रही है। इसी तरह गेंदालाल पेट्रोल पंप के पास बने काम्प्लेक्स की सफाई पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मुख्य मार्गो को चमकाकर अधिकारी अपनी पीठ थपथपाने में लगे हैं। जिससे लोगों का गुस्सा जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति पनप रहा है।
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दलेल लगाकर लगाई जाती सफाई
बाजारों में सुबह कूड़ा उठाया जाता है, शाम के फिर इकट्ठा हो जाता है। ऐसी जगहों पर दलेल लगाकर सफाई कराई जा रही है। बेसमेंट में जब तक चैनल नहीं लगेगा तब तक उसे साफ सुथरा बनाना मुश्किल है। सफाई के लिए लगभग हर विभाग में सफाई कर्मियों की तैनाती है, जिसकी सफाई के लिए वह जिम्मेदार हैं।
दिनेेश कुमार बिरौनिया
सफाई एवं खाद्य निरीक्षक
नगर पालिका परिषद ललितपुर।