ललितपुर। समाधि सम्राट आचार्य सुमति सागर महाराज का 26वां समाधि दिवस समारोह जैन समाज द्वारा उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रसंत षष्ठपट्टाचार्य ज्ञानसागर महाराज की प्रेरणा से जूम और यूट्यूब पर श्रुत संवर्द्धन संस्थान के तत्वावधान में आयोजित वेबिनार में आचार्य सुमतिसागर महाराज को समारोह पूर्वक विनयांजलि समर्पित की गई।
वेबिनार में मंगलाचरण प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर ने किया। चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन श्रेष्ठि रवि जैन सीए, सूरत ने सपरिवार किया। इसके बाद स्वागत भाषण योगेश जैन खतौली ने प्रस्तुत किया। तत्पश्चात आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने अपने उद्बोधन में (रिकार्ड किया हुआ) कहा कि आचार्य सुमति सागर श्रमण परंपरा के विलक्षण और तपस्वी संत तो थे ही उन्होंने समाज और संस्कृति को भी एक नई दिशा दिखाई। मुख्यवक्ता प्रो. नलिन के. शास्त्री बोधगया ने कहा कि देह और विदेह के बीच फर्क की परिभाषा को आचार्य सुमति सागर जी ने साधना से स्फूर्त किया। उनके परम शिष्य आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज ने भी संबोधित किया। मुख्य वक्ता प्रो. अनुपम जैन जी ने कहा कि छाणी परम्परा में सबसे प्रभावक संत थे। आचार्य ज्ञानासागर जी उनके सक्षम शिष्य हैं। सारस्वत अतिथि व्याख्यान वाचस्पति डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत ने कहा कि आचार्य सुमतिसागर जी कठोर तपस्वी और आर्षमार्गानुयायी थे। निदेशक ब्र. मनीष भैया ने कहा कि आपके उपदेश से अनेक आर्षमार्गानुयायी ग्रंथों का प्रकाशन हुआ। डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने अद्वितीय संत आचार्य सुमतिसागर जी का जीवन परिचय प्रस्तुत किया। समन्वयक एवं प्रस्तुति प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर, मनीष विद्यार्थी शाहगढ़, मनीष जैन तिजारा रहे। आयोजन को सफल बनाने में मार्गदर्शक अनीता दीदी, जय निशांत टीकमगढ़, श्रुत संवर्द्धन संस्थान मेरठ के हंसकुमार जैन मेरठ, महामंत्री, योगेश जैन खतौली, अध्यक्ष, विवेक जैन गाजियाबाद कोषाध्यक्ष आदि का योगदान रहा।