जिला प्रशासन की लगातार होने कई कार्रवाइयों के बाद भी एआरटीओ कार्यालय के नजदीक दलालों की दुकानों का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस व रेडियम का कार्य सब कुछ दलालों द्वारा किया जा रहा है। दलालों के अलावा कार्यालय में तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा लाभ कमाया जा रहा है।
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय हमेशा किसी न किसी कारण से सुर्खियों में बना रहता है। एआरटीओ विभाग हमेशा ही किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बना रहता है। यहां कोई भी कार्य दलालों के दखल के बिना आसानी से पूरा नहीं हो सकता है। दलालों का एआरटीओ कार्यालय से पुराना नाता रहा है। पूर्व में शहर में स्टेशन रोड पर पुराने एआरटीओ कार्यालय के संचालन के समय भी दलालों की दुकानें फलफूल रही थीं, वह आज भी नया एआरटीओ कार्यालय झांसी रोड पर हरदीला मुहल्ला में पहुंचने के बाद भी जस की तस दौड़ रही हैं। यहां शुरुआत में दलालों की दुकानें एआरटीओ कार्यालय वाली गली में ही कुछ निर्धारित दूरी तक ही स्थापित की गई थीं। लेकिन अब यह दायरा धीरे-धीरे विस्तृत होता जा रहा है।
एक ओर जहां गली में दुकानें खोलने को जगह की होड़ मची हुई है, वहीं अब एआरटीओ कार्यालय की गली के बाहर नहर किनारे वाली सड़क तक दलालों की दुकानों का संचालन शुरू हो गया है। विभिन्न प्रकार के वाहनों के रजिस्ट्रेशन के साथ ही लाइसेंस आदि का कार्य दलालों द्वारा कराया जाता है। यहां तक कि रजिस्ट्रेेशन, लाइसेंस व बीमा आदि के लिए यहां दलालों द्वारा धनराशि भी निर्धारित कर रखी है। कई बार तो उक्त कार्यों में एक दूसरे के दखल पर बवाल तक खड़ा हो जाता है। पूर्व में कई बार जिलाधिकारी द्वारा भी एआरटीओ कार्यालय में छापेमारी की गई और दलालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यहां तक कि मुकदमा तक लिखा गया है। लेकिन इसके बाद भी एआरटीओ कार्यालय में दलालों की भूमिका लगातार बढ़ती ही जा रही है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी खिलाफत भी करता है तो कई बार उन अधिकारियों व बाबुओं के खिलाफ भी घेराबंदी कर दी जाती है और षणयंत्र तक किया जाता है।
एआरटीओ कार्यालय में सौ रुपए में मिल रहा लिफाफा
एआरटीओ कार्यालय में दलालों की भूमिका के अलावा यहां सुरक्षा में तैनात कुछ कर्मियों द्वारा भी लाभ कमाया जा रहा है। यहां विभाग द्वारा वाहन संबंधी कार्यों के लिए लिफाफा का इंतजाम नहीं किया जाता है। जिसके चलते वाहनों के रजिस्ट्रेशन व अन्य कार्यों के लिए वाहन स्वामियों से सुरक्षा कर्मियों व अन्य लोगों द्वारा पांच रुपए का लिफाफा सौ रुपए तक में बेचा जा रहा है। कार्यालय शहर से दूर होने के चलते वाहन स्वामियों के साथ यहां खूब ठगी की जा रही है।
कार्यालय परिसर में दलालों के प्रवेश पर रोक के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि परिसर के बाहर दुकानें संचालित करने पर जिला प्रशासन व पुलिस का हस्तक्षेप होता है। वहीं सुरक्षा कर्मियों द्वारा लिफाफा बेचने का मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की जाएगी।
सतेंद्र कुमार, एआरटीओ प्रशासन।