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Lalitpur News: अदालतों में मुकदमों का पहाड़, 64 हजार से अधिक केस फाइलों में कैद

Tue, 01 Sep 2026 01:35 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
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ललितपुर। जनपद में लंबित मुकदमों का आंकड़ा न्याय व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार जिले की अदालतों में कुल 64,348 मामले लंबित हैं। इनमें 45,943 मामले यानी 71.40 फीसदी मामले एक वर्ष से अधिक पुराने हैं। इनमें सबसे ज्यादा दबाव आपराधिक मामलों का है। ऐसे 56,531 आपराधिक केस लंबित हैं, जिनमें 40,254 मामले एक साल से ज्यादा पुराने हैं। वहीं सिविल मामलों की संख्या 7,817 दर्शाई गई है और इनमें भी 5,689 मामले एक वर्ष से अधिक पुराने हैं।
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10 साल से ज्यादा पुराने मुकदमे भी 13 फीसदी

राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के एज-वाइज आंकड़े लंबित मुकदमों की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। लंबित मामलों में 21 फीसदी मामले एक से तीन वर्ष, पंद्रह फीसदी तीन से पांच वर्ष, 23 फीसदी मामले पांच से दस वर्ष और तेरह फीसदी मामले दस वर्ष से अधिक पुराने हैं।

एक महीने में 2,012 नए मुकदमे, निस्तारण 1,674 का

रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने ललितपुर में 2,012 नए मामले संस्थित हुए। इनमें 241 सिविल और 1,771 आपराधिक मामले थे। इसके मुकाबले इसी अवधि में कुल 1,674 मामलों का निस्तारण हुआ, जिसमें 161 सिविल और 1,513 आपराधिक मामले शामिल हैं। आंकड़ों से यह भी सामने आता है कि निस्तारित मामलों में 1,480 मामले निर्विवाद, जबकि 194 मामले विवादित थे।
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महिलाओं के 6,243 और वरिष्ठ नागरिकों के 3,413 मामले

लंबित मामलों में महिलाओं द्वारा दाखिल 6,243 मामले शामिल हैं। इनमें 1,375 सिविल और 4,868 आपराधिक मामले हैं। वहीं वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े 3,413 मामले लंबित हैं। इनमें 2,240 सिविल और 1,173 आपराधिक मामले शामिल हैं।

राजेश देवलिया।

लंबित मामलों की संख्या को केवल आंकड़े के रूप में देखने के बजाय यह देखना जरूरी है कि पुराने मामलों के निस्तारण में वास्तविक बाधाएं क्या हैं। पुराने मुकदमों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर नियमित सुनवाई की व्यवस्था से स्थिति में सुधार हो सकता है।

-राजेश देवलिया, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन।

गोविंद नारायण सक्सेना।

आपराधिक मामलों की संख्या बहुत अधिक है। पुलिस रिपोर्ट, गवाहों की उपलब्धता, समन-वारंट की तामीला और अन्य प्रक्रियात्मक कारणों का मुकदमों की गति पर प्रभाव पड़ता है। इन स्तरों पर बेहतर समन्वय जरूरी है।

-गोविंद नारायण सक्सेना, अधिवक्ता।

अशोक कुमार रिछारिया।

पुराने सिविल मुकदमों में पक्षकार वर्षों तक संपत्ति और अन्य अधिकारों के विवाद का समाधान चाहते रहते हैं। समयबद्ध सुनवाई और अनावश्यक स्थगन पर प्रभावी नियंत्रण से पुराने मामलों के निस्तारण में तेजी लाई जा सकती है।

-अशोक कुमार रिछारिया, अधिवक्ता।

पुष्पेंद्र सिंह चौहान।

राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के आंकड़े न्यायिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ललितपुर में 45 हजार से अधिक मामलों का एक वर्ष से पुराना होना इस बात की जरूरत बताता है कि पुराने मामलों के लिए अलग रणनीति बनाकर चरणबद्ध तरीके से बैकलॉग कम किया जाए।-पुष्पेंद्र सिंह चौहान, पैनल अधिवक्ता।
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