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मन के विकार रोक लेते उन्नति का पथ

Sun, 11 May 2014 05:31 AM IST
Lalitpur
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ललितपुर। तुवन मंदिर में चल रही श्रीहरि कथा के दौरान स्वामी सुरेशानंद ने कहा कि मनुष्य यदि विकारों पर अंकुश लगा ले तो उसके जीवन की सभी परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। विकार का परित्याग करने वाले श्रेष्ठ बन जाते हैं जबकि इससे युक्त ज्ञानी भी सर्वत्र निंदा का पात्र बनते हैं।
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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संयोजन में आयोजित कथा के छठवें दिन व्यास ने कहा कि मांस के टुकड़े पर दृष्टि लगाने से रावण जैसा ज्ञानी भी पशु बन गया। रावण ने श्रेष्ठ विप्र कुल में जन्म लेकर अपार शक्तियां अर्जित कर सृष्टि को सुखद बनाने का लक्ष्य बनाया, लेकिन कुदृष्टि ने उसका नाश कर दिया। रावण की भांति बहुत से लोग शिक्षा और संसार की जानकारियां प्राप्त करने के बाद भी मन के विकार की वजह से आगे नहीं बढ़ पाते। उन्होंने आगे कहा कि जो तनिक भी हरि काज के काम आता है उसका उद्धार करने में प्रभु देर नहीं लगाते। इस कलिकाल में भी परमात्मा का दर्शन हो सकता है। संगीतमय कथा में ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा का कार्यक्रम 12 मई को सुबह दस बजे आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई। इस मौके पर हरीश कपूर, श्रीप्रकाश जायसवाल, अजय श्रीवास, विवेक जायसवाल, चंद्रशेखर पंथ, सुनील शर्मा, संतोष राठौर आदि उपस्थिति रहे।
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