मैया के जयकारों से गूंजे मूंदिर व देेवी पांडाल
चंडी माता मंदिर पर सजा मैया के नौ स्वरूपों का दरबार
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर में नवरात्रि पर्व की धूम है, जगह-जगह देवी पांडालों में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की गई और रोजाना सुबह-शाम भव्य आरती व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके चलते इस समय गली-गली में विराजी देवी मैया के पांडालों व देेवी मंदिरों में मैया के जयकारों की धूम मची है। चंडी माता मंदिर पर भी देवी स्वरूप नौ देेवी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जबकि आजादचौक पर भव्य पांडाल में आकर्षक दुर्गा प्रतिमा मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जिसके दर्शनार्थ श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है।
शहर में इस बार करीब ढाई सौ देवी प्रतिमाएं दुर्गा समितियों द्वारा स्थापित की गई हैं। पहले दिन की स्थापना से ही देवी पंडालों में हर रोज सुबह व शाम को भक्तों द्वारा दुर्गा मां की भव्य आरती का आयोजन किया जा रहा है। आजादचौक पर समिति द्वारा विशाल पंडाल सजाया गया है, जिसमें आकर्षक दुर्गा प्रतिमा को स्थापित किया गया है। अपनी रंग और दशभुजायुक्त देेवी प्रतिमा के साथ गणेश प्रतिमा एवं भक्त द्वारा पूजन करती प्रतिमा भी स्थापित की गई है। इसके साथ ही अन्य देवी प्रतिमाएं भी आकर्षण और अधिक बढ़ाती हैं। इस भव्य प्रतिमा को देखने के लिए दिन भर लोगों का तांता लगा रहता है। वहीं, श्री सिद्ध पीठ चंडी मंदिर धाम पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की भव्य झांकी का दरबार के दर्शन के लिए भक्तों का मेला लग रहा हैं। दुर्गा मां के दरबार का पूजन व महाआरती चंडीपीठाधीश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज के सानिध्य में किया गया। भक्तों को प्रवचन सुनाते हुए चंडीपीठाधीश्वर ने कहा कि नवरात्र शक्ति महापर्व पूरे भारतवर्ष में बड़ी श्रद्धा व आस्था के साथ मनाया जाता है। भारत ही नहीं पूरे विश्व में शक्ति का महत्व स्वयं सिद्ध है और उसकी उपासना के रूप अलग-अलग हैं। समस्त शक्तियों का केंद्र एकमात्र परमात्मा है, लेकिन वह भी अपनी शक्ति के बिना अधूरा है। संपूर्ण भारतीय वैदिक ग्रंथों की उपासना व तंत्र का महत्व शक्ति उपासना के बिना अधूरा है। शक्ति की मां रूप में पूजा होती है। इस मौके पर विजय जैन कल्लू, दुर्गा प्रसाद कांकर, प्रकाशनारायण श्रीवास्तव समेत सैकड़ों की संख्या में भक्त आदि उपस्थित रहे।
व्यक्ति को जीवन में दान अवश्य करना चाहिए: आचार्य दीपककृष्ण
ललितपुर। नेहरू नगर स्थित टौरिया माता मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा का सोपान कराते हुए भागवताचार्य दीपककृष्ण महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जीवन में दान अवश्य करना चाहिए। दान का बड़ा महत्व हैं। दान करने से मनुष्य की यश व कीर्ति युगों-युगों तक रहती हैं। दानवीर कर्ण व राजा बलि को उनकी दानशीलता के कारण जाना जाता हैं। यज्ञ, दान तथा तप इन तीन सत्कर्मों को कदापि नहीं छोड़ना चाहिए। यज्ञ, दान, तप मनुष्यों को पवित्र व पावन बनाने वाले हैं। श्रद्धा एवं सामर्थ्य से दान के सत्य स्वरुप को जानकर किया गया दान लोक-परलोक दोनों में ही कल्याण करने वाला होता है। संपूर्ण फल की प्राप्ति सत्पात्र को दान देने से ही प्राप्त होती है। इसलिए आत्मकल्याण की इच्छा रखने वाले को दान देना चाहिए। उन्होंने कहाकि दरिद्रता को दूर करने का अमोघ शस्त्र है दान। दरिद्रता आदि दुखों से दूर रहने का यहीं एकमात्र साधन है। दानशील पुरुष या स्त्री किसी भूखे, प्यासे, तिरस्कृतों का पालन-पोषण करके उन्हे तृप्त करते है तो वो सदा प्रसन्नता को प्राप्त करते है। वे सदा ही अपने जीवन में आनंदित रहते है। पुराणों में धन की तीन गति बताई गई हैं। धन की तीन गतियां होती है दान, भोग और नाश। जो व्यक्ति धन का दान व भोग नहीं करता उसकी तीसरी गति अर्थात् नाश होती है। हमारे शास्त्रों में धन की सबसे अच्छी गति दान है। दान देने से हमारा धन पात्र के पास पहुंच गया और उसकी जरुरी आवश्यकता पूर्ण हो गई। इसीलिए यह श्रेष्ठ गति है। यदि हम दान न देकर उसका भोग करेंगे तो आवश्यक-अनावश्यक कर्मों में व्यय होगा। यदि खर्च ही नहीं करेंगे तो तीसरी गति अर्थात् नाश को प्राप्त होगा। क्योंकि दान के माध्यम से अत्यंत आवश्यकता वाले के उद्देश्य की पूर्ति होती है। इसप्रकार दान देना हमारा कर्तव्य कर्म है-यह समझकर देना चाहिए। कथा में पूजन प्रधान यजमान रामबाबू शुक्ला ने किया। इस दौरान अनेक भक्त उपस्थित रहें।