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बालिकाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शिक्षा जरूरी

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बालिकाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शिक्षा जरूरी
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अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस आज
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। कम उम्र में मां बनना या ज्यादा बच्चे पैदा करना महिला स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इससे उनकी जान जाने का भी खतरा रहता है। ऐसे में लड़कियों को सक्षम बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। सीएमओ का कहना है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए बालिकाओं को शिक्षित होना बेहद आवश्यक है। इससे कि वह अपने निर्णय खुद ले सकें।
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आज भी समाज में लड़कियों की सामर्थ्यता को शक की निगाह से देखा जाता है। हालांकि, समाज में लड़कियों पर सबसे ज्यादा जिम्मेदारियां होती हैं। इनमें घर चलाना, खाना बनाना, बच्चे पैदा करने या फिर बच्चे पालना, हर एक छोटी बड़ी चीज का ख्याल रखना शामिल है। इन सबके बाद भी नियम कानून भी उनके लिए ही हैं। जैसे कि ऐसे बैठो, ऐसे न बोलो, ऐसे न चलो, बाहर नहीं जाना हैं, इतना ही पढ़ना हैं और यही पढ़ना हैं, हर एक चीज उनके लिए निर्धारित हैं। अभी तो कुछ लड़कियां पढ़ने के लिए बाहर भी निकलने लगी हैं। वरना, सालों पहले तो उन्हें बाहर ही नहीं निकलने दिया जाता था। वर्ष 2012 से लड़कियों को सशक्त बनाने व उनकी चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से ही हर वर्ष 11 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय है, उसके साथ एक कुशल बालिका दल, यानी कि लड़कियों को सक्षम बनाने पर बात की जाएगी। विश्व बैंक समूह की सतत विकास के लक्ष्यों पर वर्ष 2017 की रिपोर्ट बताती है कि विश्व में 40 प्रतिशत महिलाओं को यह हक नहीं है कि वह कब मां बनना चाहती है और कब नहीं। उत्तर प्रदेश में अभी भी 4 प्रतिशत लड़कियां 15 से19 वर्ष की आयु में ही मां बन जाती हैं या गर्भवती होती हैं। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रताप सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी शिक्षा है। इससे लड़कियां अपने निर्णय खुद ले सकती हैं। यदि वह शिक्षित होंगी तो अपने हक में बोल सकेंगी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 4 के अनुसार उत्तरप्रदेश में 6 वर्ष या उससे ऊपर की उम्र वाली 63 प्रतिशत लड़कियां ही स्कूल जाती हैं। वहीं, कुल 61 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित हैं। यदि हम जनपद की बात करें तो कुल 55.1 प्रतिशत महिलाएं ही शिक्षित हैं। लड़कियों की शिक्षा उनके प्रजनन दर पर असर डालती हैं। जैसे कि जो लड़कियां स्कूल नहीं जाती हैं, उनकी प्रजनन दर 3.5 हैं। वहीं, जिन्होने 12 साल या उससे ज्यादा वर्ष तक शिक्षा ग्रहण की उनकी प्रजनन दर 1.9 हैं। यहां प्रजनन दर से तात्पर्य हैं कि इन महिलाओं के इतनी की दर में बच्चे हैं। यानी कि जो अशिक्षित लड़कियां या महिलाएं हैं, वह ज्यादा बच्चे करके न सिर्फ अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं बल्कि वह जनसंख्या वृद्धि के लिए भी दोषी हैं।
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