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देवी स्वरुप जवारों की निकली भव्य शोभायात्रा..

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जवारों की निकाली शोभायात्रा
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नवमी पूजन के साथ जवारों का हुआ विसर्जन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
चैत्र नवरात्रि का समापन सोमवार को जवारों के विसर्जन के साथ हो गया। शहर के मुख्य मार्गों से देवी स्वरूप जवारों की शोभायात्रा निकाली गई। नवरात्र के व्रत श्रद्धालुओं द्वारा जवारों के दर्शनों के साथ ही अपना उपवास तोड़ा।
चैत्र नवरात्रि पर प्रथमा के दिन शहर के विभिन्न मंदिरों व घरों में मन्नत के अनुसार देवी स्वरूप जवारों को श्रद्धाभाव के साथ बोया गया था। पहले दिन से ही श्रद्धालु द्वारा जवारे स्थलों पर भजन कीर्तन व अन्य धार्मिक आयोजन लगातार नौ दिनों तक चलते रहे। इस बार की नवरात्रि में अधिकांश लोगों द्वारा पंचांग कलेंडर के अनुुसार रविवार को अष्टमी व नवमीं की एक साथ पूजा-अर्चना की गई। लेकिन जवारों के लिए यह पर्व नौ दिन तक ही मनाने की मान्यता है। इसके चलते सोमवार को नवें दिन देवस्थलों व घरों में बोये गए जवारों को श्रद्धाभाव के साथ पूजन-अर्चन और आरती की गई। इसके बाद शाम के समय करीब चार बजे से शहर में जवारों की शोभायात्रा निकाली गई। यह जवारे शहर के मुहल्ला खिरकापुरा,चौबयाना, इलाइट, रामनगर, वंशीपुरा, तालाबपुरा, बड़ापुरा, चंडी मंदिर, नेहरू नगर, जुगपुरा आदि स्थानों में बोए गए थे। जवारों की शोभायात्रा में मुख्य पुजारी द्वारा जगह-जगह हवन पूजन किया जा रहा था। महिलाएं सिर पर जवारे कुंड रखकर मंगल गीत गाते चल रही थी। जवारों को श्रद्धालुओं द्वारा स्थानीय जनस्रोतों के पास विसर्जन किया गया और इसके साथ ही नवरात्रि का समापन हो गया।
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भक्तों द्वारा बोये गये जबारों का हुआ विसर्जन
बानपुर। कस्बा बानपुर में चैत्र मास की नवरात्रि पर देव स्थानों व घरों में बोये गये जवारों को मां के भक्तों द्वारा नौ दिन की सेवाभाव के बाद सोमवार को बड़े ही धूमधाम से बड़ी माता मंदिर में जाकर विसर्जित किये गये। बताते चलें कि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन मां के भक्तों द्वारा देवालयों व अपने-अपने घरों पर बड़े ही भक्ति भाव से जवारे बोये थे। भक्तो ने नौ दिन पूजन, अर्चन और साधना के बाद पंचमी व अष्ठमी पर महाआरती उतारी व अब सोमवार को अंतिम दिन पूजन-हवन करने के उपरांत सभी जवारों को मां के मंदिर पर विसर्जित कर दिए। आज दोपहर बाद जगह-जगह बोये गये जवारों को महिलाऐं व पुरुष बड़े ही श्रद्धा के साथ देवगीत गाते हुए सिर पर खप्पर रखे हुए नगर भ्रमण व अन्य देवालयों हरदौल चबूतरे पर पूजन-अर्चन के बाद कस्बे के मुख्य रास्ते से होकर बड़ी माता मंदिर पर पहुंचे, जहां भक्ति भाव के साथ विसर्जित कर दिए।
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