फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जुलाई गुजरा पर नहीं मिली यूनिफार्म, किताबें व जूते-मौजे

विज्ञापन
विज्ञापन
जुलाई बीता, नहीं मिली यूनिफार्म और किताबें
विज्ञापन

बिना स्कूल किट के कैसे सुधरेगा शिक्षा का स्तर
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जुलाई माह के अंत तक परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को यूूनिफार्म, पाठ्यपुस्तक और जूते-मौजे बांटे जाने थे, लेकिन इनमें से किसी का वितरण शत-प्रतिशत नहीं हो सका है। बच्चों को अभी तक एक-एक सेट भी यूनिफार्म वितरित नहीं हो सकती है और लगभग 15 फीसदी किताबें ही बच्चों को वितरित हो सकी हैं। इसके अलावा अभी तक एक भी छात्र या छात्रा को जूते-मौजे नहीं बांटे जा सके हैं।
प्रदेश सरकार व शासन बेसिक शिक्षा केे बेहतर बनाने के लिए तमाम प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह प्रयास केवल हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। वर्तमान में बेसिक शिक्षा विभाग की जो दुर्दशा है उसके मद्देनजर परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों की तरह बना पाना खुली आंख से सपना देखने के बराबर है। शैक्षिक सत्र 2018-19 की शुरुआत एक अप्रैल से हो गई थी, अभी तक पूरे चार महीने बीत गए हैं। अगले माह सितंबर के अंत में परिषदीय विद्यालयों की अर्द्धवार्षिक परीक्षा आयोजित होगी। अभी तक बच्चों को पढ़ने के लिए किताबें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। कक्षा 01, 02, 03 और कक्षा 06 के बच्चों की अभी तक किसी भी विषय की किताबें जनपद में नहीं आई है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो कक्षा 01 से कक्षा 08वीं तक के सभी बच्चों की और सभी विषयों की कुल 12 लाख 16 हजार 440 किताबें शासन से आनी हैं, लेकिन इनमें से अभी तक केवल ढाई लाख तक ही किताबों की आपूर्ति जनपद में हो सकी है। इसके अलावा अभी तक करीब दो लाख किताबों का उठान विद्यालयों द्वारा कर लिया गया है, लेकिन अभी तक बच्चों को सभी किताबें नहीं बांटी जा सकी है। किताबों का शत-प्रतिशत वितरण होने में यह अगस्त का माह भी लगभग पूरा बीत जाएगा और सितंबर माह में बच्चों की अर्द्धवार्षिक परीक्षा है। किताबों के बिना परिषदीय विद्यालयों के शैक्षिक स्तर का अंदाजा खुद व खुद लगाया जा सकता है। इसके अलावा शासन अपने कान्वेंट स्कूलों को टक्कर देने के लिए परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम से संचालित कराए जा रहे हैं। लेकिन अभी तक अंग्रेजी माध्यम की एक भी किताब की आपूर्ति नहीं हो सकी है। बिना किताबों व पाठ्यक्रम के बेसिक शिक्षा को बेहतर किसी सपने से कम नहीं है।
विज्ञापन


बच्चों को नहीं मिल सके जूते-मौजे
अभी तक जनपद में किसी भी बच्चे को जूते-मौजे नहीं मिल सके हैं। जूते-मौजों की आपूर्ति किताबों की तरह शासन स्तर से ही की जाती है। शासन ने जिला बेसिक शिक्षा विभाग की डिमांड पर जनपद के कुल 01 लाख 65 हजार 325 छात्र-छात्राओं के दो-दो सेट मौजे तो पिछले माह ही भेज दिए थे, लेकिन जूतों की आपूर्ति करने में लेटलतीफी की जा रही है। यही कारण है कि अभी तक जनपद के किसी भी बच्चे को जूते-मौजे नहीं मिल सके हैं। शासन स्तर से विगत दिवस केवल जखौरा विकासखंड की छात्राओं के लिए 17 हजार 125 जूतियां भेजी हैं, जिनका बृहस्पतिवार को संबंधित विद्यालय द्वारा उठान कर लिया गया है। इसके अलावा बृहस्पतिवार को ही जनपद के अन्य विकासखंडों बार, महरौनी व तालबेहट में भी जूतों की आपूर्ति की गई है। अभी माल का मिलान नहीं हो पाया है, इसलिए विभागीय अधिकारी इनकी संख्या की सूचना नहीं दे पा रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो विकासखंड जखौरा क्षेत्र के विद्यालयों में कुल 33,971 छात्र-छात्राओं को, बिरधा क्षेत्र में 26,446, तालबेहट क्षेत्र में 25,497, बार क्षेत्र में 24,297, महरौनी क्षेत्र में 23,533, मड़ावरा क्षेत्र में 19,904 और नगर क्षेत्र में 2,675 छात्र-छात्राओं को जूते-मौजे वितरित किए जाने हैं।

अभी तक एक-एक सेट यूनिफार्म भी नहीं बांटी जा सकी
शासन से सख्त आदेश थे कि 15 जुलाई तक हर हाल में बच्चों को यूनिफार्म वितरित कर दी जाए। लेकिन अभी तक जनपद में सभी बच्चों को एक-एक यूनिफार्म भी नहीं बांटी जा सकी है। विभाग का दावा है कि जनपद में 70 फीसदी से अधिक बच्चों को एक-एक सेट यूनिफार्म वितरित की जा चुकी है। जिस धीमी रफ्तार से यूनिफार्म वितरण का काम चल रहा है, उससे तो आगले एक-दो माह में यूनिफार्म बांटी जा सकेगी।
विज्ञापन


इनका कहना है
यूनिफार्म का वितरण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा जैसे-जैसे शासन द्वारा किताबों की आपूर्ति की जा रही है, उनको विद्यालयों में पहुंचा दिया जा रहा है। इसी तरह आपूर्ति के अनुसार जूतों का भी वितरण किया जा रहा है।
- मायाराम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें