बाघ के जोड़े की सूचना से वन विभाग में हड़कंप
ललितपुर।
ललितपुर वन रेंज में बाघ का जोड़ा होने की सूचना से विभाग में हड़कंप मच गया। लेकिन, जब उसके तेंदुआ होने की पुष्टि हुई तब जाकर अफसरों ने राहत की सांस ली है। पिछले कई दिनों से शहर में इसे लेकर कौतुहल बना रहा।
जिले के 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल में कई वन्य जीव प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। यही वजह है कि झांसी मंडल के जंगलों में कहीं भी शेर, बाघ नहीं बचे हैं। तेंदुआ की भी संख्या काफी कम हो गई है। ललितपुर वन रेंज के अंतर्गत मुचकुंद गुफा के आसपास तेंदुआ का जोड़ा देखा जा रहा है। बीते दिनों तेंदुुआ ने एक जानवर का शिकार कर लिया तो बाघ का जोड़ा होने की अफवाई फैल गई। जिसे लेकर शहर में भी कौतुहल दिखा। जिले के कई बड़े अफसरों ने इसकी पुष्टि करने की कोशिश की। जब सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक गोविंद शरण ने ललितपुर वन रेंजर जीपी शुक्ला से वास्तविक स्थिति का पता लगाने के निर्देश दिए। इसमें पाया कि किसी ने तेंदुआ को बाघ समझ लिया लेकिन वास्तव में इन दिनों तेंदुआ का जोड़ा मुचकुंद गुफा के आसपास देखा जा रहा है। जब कभी यह मध्य प्रदेश के जंगलों में चला जाता है। तेंदुआ ने एक जानवर का शिकार किया तो इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं ग्रामीणों में होने लगी। उधर, डीएफओ गोविंद शरण का कहना है कि जिलाधिकारी ने भी इस संबंध में जानकारी चाही थी। जंगल में बाघ कहीं नहीं हैं।
मध्य प्रदेश ने लगाए हैं जीपीएस कॉलर
मध्य प्रदेश में घना जंगल होने से बाघ की उपस्थिति बनी हुई है। इसकी सुरक्षा के लिए वन अफसरों ने ऐसे जानवरों के गले में जीपीएस कॉलर बांध रखा है। जैसे ही इस तरह के जानवर उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते हैं तो उन्हें इसकी सूचना मिल जाती है और वह उनकी सुरक्षा के लिए साथ चल पड़ते हैं। इस बार मध्य प्रदेश के किसी अफसर ने ललितपुर के अफसरों से संपर्क भी नहीं किया है।