बिजली चोर पकड़वाओ इनाम पाओ
ललितपुर।
पावर कार्पोरेशन द्वारा अब बिजली चोरी पकड़ने के लिए मुखबिर योजना शुरू की गई है। इसमें बिजली चोरी की मुखबिरी करने वालों के लिए उक्त विद्युत चोरी पर वसूले जाने वाले शमन शुल्क की धनराशि का 10 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। इस मुखबिरी योजना में विद्युत अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया है। इस योजना के तहत बिजली चोरी की जानकारी देने वालों की गोपनीयता पुलिस अधीक्षक प्रवर्तन द्वारा रखी जाएगी।
प्रदेश के कई जिलों में हर माह सैकड़ों लोगों द्वारा बिजली चोरी कर अनियमित रूप से विद्युत का उपभोग करते हैं, जिससे उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन को लाखों रुपये के राजस्व की क्षति होती है। ललितपुर जनपद में पिछले माह नवंबर में ही 205 विद्युत चोरी के मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। जबकि बहुत से लोगों को लेकिन अब बिजली करना किसी के लिए आसान नहीं हो सकेगा। बिजली चोरी की जानकारी यदि विद्युत चोर के पड़ोसी या किसी भी अन्य व्यक्ति को है, तो वह उसकी मुखबिरी करके लिए उस विद्युत चोर के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। इसका कारण यह है कि उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन से बिजली चोरी पकड़ने के लिए मुखबिर योजना शुरू की है। इसकी शुरुआत एक दिसंबर से की गई है। इस योजना के अंतर्गत बिजली चोरी की सूचना दिए जाने पर यदि सफलता मिलती है तो ऐसे मुखबिर को प्रोत्साहन दिए जाने की व्यवस्था गई है। यह सूचना सतर्कता इकाई या उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के किसी भी आधिकारिक स्तर पर दी जा सकेगी। प्रवर्तन दल या पावर कार्पोरेशन द्वारा गठित टीम द्वारा मुखबिर की सूचना पर छापामारी करने पर और सफलता अर्जित होने की स्थिति में उक्त बिजली चोरी पर शमन शुल्क के रुप में जमा 20 हजार रुपए से 4,99,999 रुपये तक वसूली जाने वाली धनराशि का अधिकतम दस प्रतिशत प्रोत्साहन राशि मुखबिर को दी जाएगी। जबकि पांच लाख रुपये या उससे अधिक रुपये का शमन शुल्क वसूले जाने की स्थिति में मुखबिर को पचास हजार रुपये तक दिया जाएगा। प्रवर्तन दल या अन्य विभागीय अधिकारी और कर्मचारी को मुखबिर की श्रेणी में नहीं माना जाएगा। मुखबिर का नाम और उसके संबंध में सूचना पूर्ण रूप से गोपनीय रखी जाएगी। मुखबिर के नाम की पुष्टि और मुखबिर की गोपनीयता बनाए रखने का दायित्व संबंधित डिस्कॉम के पुलिस अधीक्षक का होगा। इस योजना में मुखबिर के नाम का प्रकटीकरण नहीं किया जाएगा, क्योंकि मुखबिर को वैधानिक रूप से सुरक्षा प्राप्त है। मुखबिर किसी भी माध्यम जैसे-टेलीफोन, ईमेल, एसएमएस या आईटी की कोई भी प्रणाली पत्र व्यक्तिगत आदि से सूचना देने के लिए स्वतंत्र होगा। मुखबिर की सूचना पर बिजली चोरी पकड़े जाने पर संबंधित प्रवर्तन दल इसकी लिखित सूचना कार्यक्षेत्र के प्रभारी अपर पुलिस अधीक्षक को लिखित रूप में देंगे और अपर पुलिस अधीक्षक ऐसे प्रकरणों से संबंधित मुखबिर से संबंधित सूचना परम गोपनीय पुस्तिका में अंकित करते हुए अपनी निजी अभिरक्षा में रखेंगे। अपर पुलिस अधीक्षक के स्तर पर मुखबिर के अभिलेखीकरण के लिए रजिस्टर का प्रारूप भी तय किया गया है, जिसमें उसका नाम, पता, फोन नंबर, सूचना का माध्यम, छापामारी स्थल व विवरण, प्राप्त शमन की धनराशि व तारीख, पुरस्कार राशि, मुखबिर के हस्ताक्षर व सत्यापनकर्ता के हस्ताक्षर होंगे। पुलिस अधीक्षक प्रवर्तन द्वारा मुखबिर को उसी माह उक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी और इसका विवरण हर माह सतर्कता मुख्यालय भेजा जाएगा। मुखबिर को यह प्रोत्साहन राशि पुलिस अधीक्षक प्रवर्तन या संबंधित अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा दी जाएगी।
प्रवर्तन दल को भी शुरू की प्रोत्साहन योजना
प्रवर्तन दलों द्वारा अपने क्षेत्र में विद्युत चोरी रोकथाम के निर्वहन के दौरान कतिपय मौकों पर जनसमुदाय के विरोध और अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ता है। विद्युत चोरी के अभिशाप को सफलता पूर्वक खत्म करने के लिए प्रवर्तन दल के सदस्यों को प्रेरित बनाए रखने के लिए रीडिंग टीम और उसके सदस्यों को प्रोत्साहन राशि के रूप में कंपाउंडिंग फीस का दस प्रतिशत राजस्व निर्धारिण एवं कंपाउंडिंग फीस की वसूली के बाद दिया जाना प्रस्तावित है। इसमें रेड प्रवर्तन दल या डिस्कॉम प्रवर्तन दल या दोनों की सहभागिता से बना हुआ दल शामिल हो सकते हैं। रेड दल के अंतर्गत पुलिस बल, सहायक अभियंता, जूनियर इंजीनियर, लाइन मैन, टीजीटू, ड्राइवर, कैमरामैन या अन्य व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। प्रोत्साहन राशि का अस्सी प्रतिशत (वसूली गई कंपाउंड फीस का अस्सी प्रतिशत) रेड दल के सभी सदस्यों में समान रूप से वितरित किया जाएगा।
बिजली चोरी के लिए यह मुखबिर और प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है। इसमें मुखबिरों की सूचना पूर्णत: गोपनीय रखी जाएगी। यदि बिजली चोरी की सूचना सही पाई जाती है, तो जानकारी देने वाले को उस बिजली चोरी पर वसूले गए शमन शुल्क में से मुखबिर को दस प्रतिशत धनराशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी।
डीआर विमलेश, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड।