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सकरे पुल बने शहरवासियों के लिए सिरदर्द

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संकरे पुल बने सिरदर्द, भारी वाहन फंसने से लग जाता जात
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ललितपुर। शहर में वर्षों पुराने संकरे पुल शहरवासियों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। इन पुलों पर आए दिन भारी वाहनों के गुजरते समय जाम जैसे हालात बन जाते हैं। कई बार यातायात सामान्य होने में घंटों लग जाते हैं। इन दिनों चल रहा सहालग का सीजन और गेहूं खरीद के चलते शहर में वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है।
नगर पालिका परिषद आवागमन सुगम बनाने के लिए शहर की सड़कों के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च कर रही है। बीते महीनों में कई सड़कों का निर्माण हुआ है, लेकिन वर्षों पुराने संकरे पुलों की सुध नहीं ली जा रही है। खासकर, जेल चौराहा स्थित ब्याना नाला का पुल व शहजाद नदी का पुल है। दोनों ही पुल वर्षों बीत जाने के बाद भी उपयोगी बने हुए हैं। आज भी शहरवासी इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। इन पुलों से जब भी भारी वाहन निकलते हैं, तब जाम जैसे हालात बन जाते हैं। गत दिवस जेल चौराहा स्थित ब्याना नाले की पुल पर सुबह ग्यारह बजे वाहनों की लंबी कतार दोनों ओर से लग गई थी। यह कोई एक दिन की बात नहीं है, ऐसा आए दिन होता है। इन दिनों सहालग का सीजन चल रहा है। वहीं, नवीन गल्ला मंडी में गेहूं की खरीद भी प्रारंभ हो गई है। यही विभिन्न एजेंसियों के क्रय केंद्र भी खुले हुए हैं। जिस कारण ब्याना नाले के पुल पर अनाज से लदे ट्रैक्टर ट्रालियों की आवाजाही बढ़ गई है। इसी मार्ग से बसों का भी आवागमन है। इससे इस मार्ग पर वाहनों का दबाव कुछ ज्यादा है। इसके बाद भी संकरे पुल को चौड़ा नहीं किया जा रहा है। जब भी इस पुल से दो बड़े वाहन निकलने का प्रयास करते हैं, उसी दौरान जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। विभिन्न संगठन संकरे पुलों को चौड़ा करने की मांग उठा चुके हैं लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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क्षतिग्रस्त पुल की हो रही अनदेखी
पुराना रजवारा रोड स्थित पंचमुखी मंदिर के पास शहजाद नदी का क्षतिग्रस्त पुल की सुध नहीं ली जा रही है। बरसात के दौरान गोविंद सागर बांध के गेट खोले गए थे। इसमें शहजाद नदी उफना गई थी। पानी के बहाव के साथ इस पुल की द्वारी में जलकुंभी फंस गई थी। जिसमें वर्षो पुराना पुल ढह गया था। वर्तमान में नगर पालिका ने आवागमन को सुचारु बनाने के लिए मिट्टी डलवा दी थी। जिससे यहां से वाहनों का आना-जाना प्रारंभ हो गया है। लेकिन, अब स्थानीय लोगों को पक्का निर्माण नहीं होने की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि यदि बरसात से पहले इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ तो पानी में पुल की मिट्टी बह जाएगी। जिससे एक बार फिर रास्ता कट जाएगा। ऐसा ही हाल मोहल्ला घुसयाना में ब्याना नाले का क्षतिग्रस्त पुल का है। यह भी सालों से यूं ही क्षतिग्रस्त पड़ा है। नगर पालिका की उदासीनता से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।

सड़कों पर लगने लगे जाम
शहर में पांच साल पहले कोई वाहनों के जाम के बारे में सोचता नहीं था लेकिन अब वाहनों का जाम लगना आम बात हो गई है। सकरे पुल इसके लिए चर्चित हो गए हैं। कई लोग जाम से बचने के लिए रास्ता बदलने लगे हैं।
अनुज किलेदार

जनप्रतिनिधि बने उदासीन
शहर में कई रास्ते व पुल खराब हैं, जिन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पुराना रजवारा रोड पर पंचमुखी मंदिर है। इसके अलावा यह मार्ग ग्राम पनारी को शहर से सीधा जोड़ता है। इसके बाद भी क्षतिग्रस्त पुल की सुध नहीं ली जा रही है। चाहे वह जनप्रतिनिधि हों या फिर अधिकारी। यदि अभी ध्यान नहीं दिया तो बरसात के दिनों में यहां से निकलना मुश्किल हो जाएगा।
अजय गोस्वामी

कम है पुलिस बल
संकरे पुल पर एक साथ कई वाहन घुस जाते हैं, जिससे जाम जैसी बन जाती है। इस समय पुलिस बल की अन्य जगहों पर ड्यूटी लगी हुई है। जिससे कर्मियों की कमी महसूस की जा रही है। जैसे ही सूचना मिलती है, वैसे ही मौके पर पहुंचकर जाम खुलवा दिया जाता है।
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नासिर अली, सहायक यातायात प्रभारी

चार माह पहले मिले थे सीएम से
करीब चार माह पहले सदर विधायक व जिलाध्यक्ष के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस दौरान नेहरू नगर पेयजल योजना व संकरे पुलों के चौड़ीकरण का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने शीघ्र ही पुलों के चौड़ीकरण की उम्मीद जताई है।
रजनी साहू, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद
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