एक जात के वोटन सें कोनऊ नहीं जीत पाओ
ललितपुर। लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में विभिन्न दलों द्वारा गतिविधियां बढ़ाने के लिए जगह-जगह चुनावी कार्यालय खोले जा रहे हैं। वहीं, दुकानदार दोपहर के समय ग्राहकी कम होने पर सियासी चर्चा कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा नझाई बाजार का रहा।
मोहल्ला सरदारपुरा निवासी सत्यनारायण कहते हैं कि जैसई चुनाव की घोषणा हो जात, वैसई जात- बिरादरी कौ जोर दिखान लगत। ऐसो नइयां कि लोगन में ही जात की चर्चा होत, बड़े-बड़े नेता भी उम्मीदवारन की जाति-बिरादरी को हिसाब- किताब देखकें हार- जीत को फैसला करत। मोहल्ला चौबयाना निवासी अनिल कहते हैं कि अब तो पार्टियन के नेता अपने उम्मीदवार जात-बिरादरी के आधार पर तय करन लगे। कछू पार्टी तो ऐसीं हैं जो चुनाव आवे से पैलें जाति- बिरादरी के नेतन को साधवो शुरू कर देत। लक्ष्मीपुरा निवासी अब्दुल कहते हैं कि भैया, अब जिन जात, बिरादरी के वोट कम हैं, उनखों कोउ पूछत नइयां। वे तो केवल वोट डारवे के लाजे रैं गईं। छोटी समाजन के नेता तो चुनाव लड़वे की सोचवें नईं। कायके नेतन को तो बड़ी बिरादरी चानें, जिनको थोक वोट होवे।
नझाई बाजार निवासी राहत खान कहते हैं कि भले बड़ी जात, बिरादरी की पूंछ परख बढ़ गई, लेकिन एक जात, बिरादरी के वोटन से कोनऊ जीत नइ पाओ, जब तक कि सबई जातन को वोट न मिल जाए। आजादपुरा निवासी पन्नालाल कुशवाहा कहते हैं कि जात, बिरादरी को हवा देवे को काम नेता करत हैं। उनको एकई मकसद रत है कै वे अपनों प्रत्याशी को जिता लेवें, चाहे समाज में वैमनस्यता बढ़वे या नहीं। इसे उन्हें कोनऊ मतलब नइयां। इसी दौरान किराने की दुकान पर ग्राहक आ जाते हैं, जिससे चर्चा पर विराम लग जाता है।