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बिना ले-आउट पास के ही स्वीकृत किए जा रहे मानचित्र

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बिना ले-आउट पास के ही स्वीकृत किए जा रहे मानचित्र
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ललितपुर।
शहर में बिना मानचित्र स्वीकृति के और हरित पट्टी में हो रहे अवैध निर्माण पर प्राधिकरण विभाग पर प्रशासन दोनों ही रोक नहीं लगा पा रहे हैं। शहर के बीचों-बीच मुहल्ला आजादपुरा में बिना ले-आउट पास के ही मकानों के मानचित्र स्वीकृत किए जा रहे हैं और इसकी आड़ में हरित पट्टी पर भी भवनों का निर्माण किया जा रहा है।
मुहल्ला आजादपुरा में नहर के दायीं ओर से सुम्मेरा तालाब के बीच का काफी बड़ा हिस्सा हरित पट्टी में आता है। यहां पर छोटे से ही हिस्से में आवासीय जमीन हैं, जिस पर पारस नाथ कालोनी बसी हुई है और वहीं नहर से सटकर कुछ हिस्सा आवासीय क्षेत्र है। पिछले वर्ष भू-माफियाओं ने यहां पर आवासीय भू-खंड के साथ हरित पट्टी पर भी प्लांटिंग कर दी है। वर्तमान में यहां पर काफी बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। शहर के बीचों-बीच इन निजी कालोनियों में अवैध तरीके से हो रहे भवनों के निर्माण में विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता को भी झुठलाया नहीं जा सकता है। प्राधिकरण विभाग ने यहां पर बिना ले-आउट पास किए ही भवनों के मानचित्र स्वीकृत कर दिए हैं और इन मानचित्र स्वीकृत हो चुके भवनों की आड़ में बिना मानचित्र स्वीकृति के हरित पट्टी पर भी अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। भू-माफियाओं ने बेखौफ होकर इस अवैध कालोनी पर भवनों का निर्माण करा दिया है और अधिकारी भी कार्रवाई के नाम पर केवल इतिश्री करने में लगे हुए हैं। बीते अगस्त माह में प्राधिकरण विभाग ने पारस नाथ कालोनी और आसपास हरित पट्टी में निर्माण कर रहे लगभग एक दर्जन भवन स्वामियों को ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए थे। इन अवैध भवनों को ध्वस्त करने की बात तो दूर विभागीय अधिकारी इन भवनों के निर्माण कार्य को भी नहीं रुकवा सके हैं। ध्वस्तीकरण के नोटिस के बाद भी निर्माण कार्य निरंतर जारी रहा जो अब पूर्ण हो चुका है। अगस्त माह में हुए इन नोटिस के बाद भी यहां पर अनेकों भवनों के नवीन निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं। यदि जिला प्रशासन केवल प्राधिकरण विभाग के भरोसे पर रहा तो यहां पूरी हरित पट्टी को खत्म करके अवैध निर्माण हो जाएंगे। जिला प्रशासन को स्वयं ही इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।
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बिना लेआउट पास के जनता को होगी समस्या
कहां पर भी सामूहिक रूप से नवीन प्लाटिंग की जाती है या फिर निजी कालोनी बसाई जाती है, तो ले-आउट पास कराने की आवश्यकता होती है। ले-आउट से ही निर्धारित किया जाता है कि इस कालोनी में जनता की सुविधा के लिए सड़कों की लंबाई-चौड़ाई कितनी होगी और जल निकासी, पार्क व आदि मूलभूत क्या करेगीं। वर्तमान में आजादपुरा में तो कालोनी बसाई जा रही है वहां का ले-आउट पास नहीं है। इससे यहां रहने वाले लोगों को भविष्य में काफी समस्या होगी। बिना ले-आउट कालोनी के भवनों का मानचित्र स्वीकृत नहीं हो सकता है और कालोनी अवैध मानी जाती है। ऐसी निजी कालोनी में नगर पालिका व अन्य विभाग सरकारी बजट से पक्की सड़कों व नाली का निर्माण नहीं करा सकते हैं।
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पुलिस रुकवाए अवैध निर्माण
इलाका पुराना है, इसलिए लेआउट पास कराने की जरूरत नहीं है। नवीन जगह पर कालोनी बसाई जाए तो लेआउट की आवश्यकता होती है। इसके अलावा हरित पट्टी में हो अवैध निर्माण को पूर्व में रुकवा दिया गया था और दोबारा निर्माण कार्य शुरू न हो इसके लिए कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी गई थी। यदि वर्तमान में भी निर्माण कार्य जारी है तो पुलिस रुकवाएगी।
- एसके प्रजापति, अवर अभियंता, नियत प्राधिकरण, ललितपुर।
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