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गोद लिए गांव में ही नियमों की अवहेलना

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गोद लिए गांव में ही नियमों की अवहेलना
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ललितपुर। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा गोद लिए गांव में निरीक्षण की सूचना देने के बाद भी नियमों की अवहेलना देखने को मिली। आंगनबाड़ी कर्मचारियों व सहायिकाओं की अनुपस्थिति पर सीडीओ ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
पोषण मिशन के अंतर्गत गोद ली गई ग्राम सभा बम्हौरीसर के आंगनबाड़ी केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्र तथा सीडीपीओ तालबेहट के कार्यालय का सूचना देकर निरीक्षण किया गया। बंहौरीसर प्रथम के आंगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचने पर वहां ताला लगा पाया गया, जबकि इसकी सूचना तीन दिन पूर्व ही बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रीति भिलवारे को दे दी गई थी। बाल विकास परियोजना अधिकारी के सीडीओ के पहुंचने के 10 मिनट बाद केंद्र पर पहुंचीं। आंगनबाड़ी केंद्र बम्हौरीसर द्वितीय पर भी ताला लगा हुआ पाया गया। दोनों केंद्र बंद रहने के संबंध में बाल विकास परियोजना अधिकारी द्वारा बताया गया कि कार्यकर्ता एवं सहायिकायें हड़ताल/धरना प्रदर्शन पर जिला मुख्यालय पर गई हैं। इसमें पाया गया कि तीन दिन पूर्व निरीक्षण की सूचना के बाद भी बाल विकास परियोजना अधिकारी द्वारा उक्त निरीक्षण को गंभीरता से नहीं लिया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने पोषण मिशन के अंतर्गत उक्त निरीक्षण एवं वजन दिवस जैसे कार्य में ऐसी लापरवाही एवं मनमानी पर दोनों केन्द्रों की कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया और कहा कि क्यों न उन्हें मानदेय सेवा से पृथक कर दिया जाए। उन्होंने उप स्वास्थ्य केंद्र बम्हौरीसर स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण भी किया, इसमें पाया कि 224 बच्चों में से 54 बच्चों का उनके घर-घर जाकर वजन कराया जा चुका है। उप स्वास्थ्य केंद्र पर महिलाओं के साथ लाए गए 2 बच्चों का वजन कराया गया। बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय तालबेहट कार्यालय के निरीक्षण में मुख्य सेविका मीना सुड़ेले को हस्ताक्षर करके वजन दिवस पर क्षेत्रीय भ्रमण पर जाना बताया गया। वह 14 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक चिकित्सा अवकाश पर रहीं। उपस्थिति पंजिका में उपलब्ध इनके प्रार्थना पत्र पर डा. सुशान्त खरे, एमडी मेडिसिन/फिजिशियन द्वारा जारी किया गया फिटनेस सर्टीफिकेट तो मिला, लेकिन मुख्य सेविका के विषय में कोई सिकनेस सर्टीफिकेट उपलब्ध नहीं मिला। मुख्य सेविका मंजू वर्मा 21 सितंबर से अवकाश पर हैं, लेकिन इनके प्रार्थना पत्र पर सिकनेस प्रमाण पत्र नहीं मिला।
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वहीं बाल विकास परियोजना अधिकारी के कक्ष में रखी कुर्सियों एवं टेबिल पर काफी मात्रा में धूल पाई गई, इससे स्पष्ट है कि बाल विकास परियोजना अधिकारी नियमित रूप से कार्यालय नहीं आती हैं। कक्ष में कार्यरत स्टाफ से संबंधित जो पोस्टर लगे हैं, वह अद्यावधिक नहीं था। कक्ष में पत्रावलियां व्यवस्थित नहीं मिली। शौचालयों से दुर्गंध आ रही थी। एक स्टोर रूम में जहां पोषाहार रखा जाता है, जमीन पर दीमक लगी पाई गई। 19 सितंबर के बाद कार्यालय में कोई पोषाहार नहीं आया है। स्टॉक पंजिका, पोषाहार वितरण पंजिका कोई भी अभिलेख देखने को नहीं मिले। कार्यालय संचालन के संबंध में पाई गई उपरोक्त कमियों/अव्यवस्थाओं के संबंध में बाल विकास परियोजना अधिकारी तालबेहट का स्पष्टीकरण लेकर सात दिन में देने के निर्देश दिए।
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