सूखे ने दी दस्तक फिर भी नहीं प्राचीन जल स्रोतों की कोई खैर खबर
ललितपुर।
क्षेत्रीय सांसद व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के निर्देशों के बाद भी जिले के अफसर सूखे से निपटने के लिए जागे नहीं हैं। प्राचीन जलस्रोतों की स्थिति बेहद खराब है, कहीं बावड़ी कूड़ाघर में तब्दील हो गई हैं तो कहीं छतदार कूप अतिक्रमणकारियों के निशाने पर हैं। इस सबको प्रशासन तमाशाई बनकर तमाशा देख रहा है।
मानसून के मौसम में कम बारिश होने से जिले में एक बार फिर सूखे ने दस्तक दे दी है। वर्तमान में नदी, तालाब, पोखर व खाली बांधों की स्थिति देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। बीते माह जिला भ्रमण को आईं क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान संभावित सूखे से निपटने के लिए अभी से इसकी पूर्व तैयारी शुरू करने की बात कही थी। इस संबंध में उन्होंने जिलास्तरीय अफसरों को निर्देश भी दिए थे। इसके बाद भी जिले में मौजूदा पेयजल ढांचे को मजबूत बनाने की कोशिशें शुरू नहीं हुई। खासकर प्राचीन जल स्रोतों के मामले में अफसर उदासीन बने हुए हैं। शहर में ही सार्वजनिक कूप एवं बावड़ी देखरेख के अभाव में कूड़ाघर में तब्दील होते जा रहे हैं। ललित टाकीज के पास बने कूप के आसपास अतिक्रमण पसर गया है। यहां तक कि पक्की दुकानों का निर्माण आसपास किया जा रहा है, जिससे कूप का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। यही स्थिति मुहल्ला खिरकापुरा व तालाबपुरा स्थित छतदार कूप की है। बीते वर्षों में कूपों की साफ सफाई हुई लेकिन अब देखरेख के अभाव में अतिक्रमण की चपेट में हैं। मुहल्ला नईबस्ती गांधीनगर में ग्राम सभा के कूप में पानी की जगह कूड़ा नजर आ रहा है। वहीं, नगर पालिका बालिका इंटर कालेज परिसर में स्थित बावड़ी को साफ कर उससे मुहल्ला चौबयाना, मऊठाना में जलापूर्ति करने की योजना बनाई गई थी। इसी तरह वंशीपुरा स्थित कूप पर लाखों रुपये खर्च किया गया। यहां वर्षों पहले जलापूर्ति के लिए बाकायदा पंप हाउस का निर्माण कराया गया था। लेकिन, जल संस्थान का दोनों जगह ही प्रोजेक्ट फेल हो गया। वर्तमान में इंटर कालेज परिसर स्थित बावड़ी में पाइप लगे नजर आते हैं तो वंशीपुरा में पंप हाउस के पाइप कटे पड़े हैं। इसी मुहल्ले में थोड़े से आगे बनी बावड़ी जीर्णशीर्ण अवस्था में है। मुहल्लेवासियों ने इसे अनुपयोगी दिखाने पर कूड़ा घर में तब्दील कर दिया है जो अब आसपास रहने वाले परिवारों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बावड़ी व छतदार कूपों की साफ-सफाई हो जाए तो गर्मियों में गहराने वाली जल समस्या का निदान हो सकता है।
कूड़ाघर में बदली बावड़ी
चार साल पहले तक बावड़ी के पानी का इस्तेमाल स्थानीय नागरिक करते थे। लेकिन जब से इस मुहल्ले में गोविंदसागर बांध से जलापूर्ति होने लगी तब से लोगों ने बावड़ी के पानी का उपयोग बंद कर दिया। नतीजा यह हुआ कि कुछ शरारती तत्वों ने बावड़ी में कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया। देखादेखी अन्य लोग भी कूड़ा डालने लगे। वर्तमान में तो यह बावड़ी कूड़ाघर में बदल गई है।
मलखान, स्थानीय नागरिक
बीमारियों के फैलने का रहता है अंदेशा
अंग्रेजों के शासनकाल में बावड़ी का निर्माण कराया गया था। इसका पानी पीने योग्य होने की वजह से सभी मुहल्लेवासी इसका इस्तेमाल करते थे। बदले दौर में बावड़ी की कोई पूंछ परख करने वाला नहीं रहा। बावड़ी में कूड़ा गिरने से अब वह मच्छरों का घर बन गया है। इसके आसपास के परिवारों को सदैव मौसमी बीमारियों से ग्रसित होने का भय सताता रहता है। नगर पालिका परिषद को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
अमृत सिंह, रिटायर कर्मचारी
पुरातत्व विभाग कराए मरम्मत
बावड़ी हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं। इससे पुरानी याद ताजा हो जाती हैं। पुरातत्व विभाग इनकी मरम्मत कराए तो जीर्णशीर्ण बावड़ी वापस अपने मूल स्वरूप में आ जाएगी। यदि बावड़ी पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएगी।
कमलेश, स्थानीय नागरिक
पानी में गया नपा का पैसा
बीते सालों में पड़े सूखे के दौरान शहर के कूपों की सफाई कराई गई थी। इसमें छतदार कूप भी शामिल थे। सूखा समाप्त होने के बाद नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों ने इन्हें पलटकर नहीं देखा। इससे शहर के सार्वजनिक कूपों का हाल बुरा हो गया है। कई स्थानों पर छतदार कूप अतिक्रमण के चपेट में आ गए हैं।
राहुल राजा, स्थानीय नागरिक
जताई अनभिज्ञता
कूप, बावड़ी में कूड़ा डालने की बात संज्ञान में नहीं है, जो भी उचित कार्रवाई हो सकेगी उसे कराया जाएगा।
अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद ललितपुर।