ललितपुर। जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जहां एक लैब टेक्नीशियन तैनात होने से नाममात्र को ही जांचें हो रही हैं। इससे मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
शासन ने अस्पतालों में लैब टेक्नीशियनों की कमी को पूरा करने के लिए एक कंपनी से अनुबंध किया था। इसके अंतर्गत तीन लैब टेक्नीशियन तैनात किए गए, जो जांचों की सत्यता को जांचने वाली मशीन का संचालन करते थे। कंपनी के कर्मचारी एक दिन में डेढ़ हजार से अधिक जांचें कर रहे थे। जांच में बायोकैमिस्ट्री की सभी जांचें होने की सुविधा थी। कंपनी के कर्मचारी मशीनों से जांच कर रहे थे, इससे कम समय में अधिक जांचें हो रही थी। एक घंटे में लगभग पचास से अधिक जांचें कर रहे थे।
कंपनी का अनुबंध फरवरी में खत्म हो गया है। तब से जिला अस्पताल में मरीजों की जांच को लेकर संकट आ गया है। कंपनी के तीनों कर्मचारियों ने अपना कार्य बंद कर दिया है। इससे बायोकैमिस्ट्री की जांचें प्रभावित हो गईं है। जांच के लिए महत्वपूर्ण मशीन बंद हो गई है। इससे जांच की सत्यता की जांच नहीं हो पा रही है। अब पैथोलॉजी में केवल एक ही लैब टैक्नीशियन कार्यरत है। इससे करीब तीन सौ जांचें ही हो पा रहीं है। शेष मरीजों को बाहर की ओर रुख करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में महंगी जांचें भी निशुल्क हो रही थीं। लेकिन, अनुबंध खत्म होते ही कर्मचारियों की कमी के चलते केवल सामान्य जांचें हो पा रही हैं। बड़ी जांचें नहीं होने से मरीज बाहर व निजी पैथोलॉजियों पर जांच कराने को मजबूर हैं। इनमें कई निर्धन तबके के मरीज जांच नहीं करा पा रहे हैैं। जांच के आधार पर ही मर्ज का व्यवस्थित इलाज हो सकता है। लेकिन, कर्मचारियों के अभाव में जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों के स्वास्थ्य का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
कंपनी का अनुबंध खत्म होने के बाद कर्मचारियों की कमी पड़ गई है। अब केवल एक ही कर्मचारी रह गया है। ब्लड बैंक के कर्मचारियों को मशीन संचालन करना सिखाया जा रहा है। शीघ्र ही अन्य जांचों की सुविधा मिल सकेगी।
- डॉ. एस के वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष