संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। यहां बाल विवाह जैसी कुरीति अब भी जिंदा है। विगत तीन सालों में इसके 57 मामले प्रकाश में आए। ये वे प्रकरण हैं, जिसके सामने आने के बाद स्वयंसेवी संस्थाओं ने रुकवाए।
सरकार वर्षों से बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ जैसे नारे दे रही है, लेकिन अशिक्षा के कारण बेटी को अब भी बोझ समझा जाता है। ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह जैसी कुरीति जिंदा है। एक निजी संस्था की रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश के 28 प्रतिशत बाल विवाह ललितपुर जनपद में हो रहे हैं। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन जनपद में संचालित प्रगति भारत संस्था ने प्रशासन को कई बाल विवाह की सूचना देकर शादियां रुकवाई हैं। 2021 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो आधा सैकड़ा से अधिक 57 प्रकरण संज्ञान में आए हैं। जबकि, कई मामलों में इसकी जानकारी ही नहीं हो पाती, जिससे समय रहते बाल विवाह रुकवाया जा सके।
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वित्तीय वर्ष - रोके गए बाल विवाह
2021-22 - 14
2022-23 - 08
2023-24 - 28
2024-25 - 07
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पुलिस व ब्लॉक स्तरीय अधिकारी नहीं देते सहयोग : जनपद में कार्यरत स्वयं सेवी संस्था के कार्यकर्ताओं ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि हमें जब बाल विवाह की सूचना मिलती है तो गांव में पहुंचकर रुकवाते हैं, लेकिन जब ग्रामीण नहीं मानते तो संबंधित थाने की पुलिस से मदद मांगते हैं, तो वह आलाधिकारियों का आदेश लाने की बात करते हैं। यही कारण है कि बाल विवाह जैसी कुरीति रुकने का नाम नहीं ले रही है।
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प्रशासन को नियमित सूचना दी जाती है। कभी तो पहले दिन शादी रुकवा दी जाती है, लेकिन उसका फालोअप न होने के कारण अगले दिन बाल विवाह हो जाता है। प्रशासन व पुलिस का सहयोग नहीं मिल पाता।-दीपाली पटैरिया, संचालक, प्रगति भारत सोसायटी।
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बाल विवाह की सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन पर सूचित किया जाता है। साथ ही बाल संरक्षण की टीम पुलिस के सहयोग से मौके पर जाकर विवाह रुकवाती है। अभिलेखों की जांच कर उनकी काउंसलिंग भी की जाती है।-नंदलाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी।