ललितपुर। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. हीरा ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया है। इससे पिछड़े वर्ग के लोगों की समस्याओं का तेजी से निदान हो सकेगा। आयोग में शिकायत करने पर 55 दिन में न्याय की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
शुक्रवार को जनपद भ्रमण पर आए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. हीरा ठाकुर ने सर्किट हाउस में पत्रकार वार्ता में बताया कि देश की आबादी में 80 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग के लोगों का भाग है। इस आबादी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ग को ताकत दी है। लोकसभा में पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया है, जो इस वर्ग के लिए संजीवनी बना है। आयोग को अधिकार दिए गए हैं कि जमीन, आपराधिक मामलों के साथ अन्य मामलों में भी न्याय न मिलने पर एक साधारण कागज पर प्रार्थना पत्र दे, जिस पर आयोग जिलाधिकारी व आपराधिक मामले के लिए पुलिस अधीक्षक से 15 दिन में आख्या लेगी। मामले की सुनवाई आयोग के कोर्ट में दोनों पक्षों को बुलाकर किया जाएगा। आयोग को संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। इतना ही नहीं आयोग को हाईकोर्ट के समकक्ष दर्जा दिया है।
उन्होंने कहा कि अब पीड़ित को न्याय पाने के लिए अधिक भटकना नहीं होगा। आयोग में प्रार्थनापत्र मिलने पर 15 दिन में आख्या और 55 से 70 दिन में न्याय मिलेगा। इस दौरान श्रम सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश सिंह लोधी, जिला उपाध्यक्ष घनश्याम साहू, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी पियूष चंद्र राय आदि मौजूद रहे।
यह गिनाई उपलब्धि
सरकार में योजनाओं का प्रचार प्रसार होने से लाभ दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष इस पूर्व दशमोत्तर छात्रवृति में इस वर्ष दो करोड़ चौरासी लाख से 13 हजार पांच सौ 33 विद्यार्थियों को लाभांवित किया गया है। दशम छात्रवृत्ति योजना में चार करोड़ 63 लाख रुपए से 16 हजार नौ सौ 48 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी है। शुल्क प्रतिपूर्ति में भी चार करोड़ 36 लाख 44 हजार से 14 हजार चार सौ चौदह बच्चों को लाभ दिया गया। इसके अलावा एक करोड़ 22 लाख की राशि से शादी अनुदान से 610 लाभार्थियों को दिया है।
पूर्व सरकारों पर साधा निशाना
पूर्व सरकारों पर निशाना साधते हुए बताया कि पूर्व सरकारों ने आयोग को लेकर कोई योजना नहीं बनाई। इससे आयोग को मजबूती नहीं मिली। लोग इसके बारे में जान नहीं सके हैं। इसके अलावा पिछड़ा वर्ग के लिए आई योजनाओं का प्रचार प्रसार नहीं किया, जिससे लोगों को विभिन्न योजनाओं को लाभ नहीं मिला है। पूर्व सरकारों ने इस ढांचे को कमजोर करने का कार्य किया है।