फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहर में पुरानी जर्जर बिल्डिंग् दे रही हादसों को न्यौता

विज्ञापन
विज्ञापन
पुरानी जर्जर बिल्डिंग दे रहीं हादसों को न्यौता
विज्ञापन

ललितपुर। नगरीय क्षेत्र में कई जगह अंग्रेजी शासकाल में बनाए गए कई पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। इन इमारतों और भवनों की समय सीमा खत्म होने के बाद अब यह जर्जर होकर लोगों के लिए खतरा बन चुके हैं और हादसों को न्यौता दे रहे हैं। जर्जर स्कूल भवन, पुरानी टॉकीज की एक इमारत, पुराना कलेक्ट्रेट भवन समेत तमाम भवन हैं, जो गिरने की कगार पर हैं। तेज हवा व आंधी में कभी भी धराशायी होने से यहां गंभीर हादसा हो सकता है।
शहर के बीचोंबीच नझाई बाजार में सबसे पुराना सिनेमाघर स्थित है, जो एक दशक पूर्व तक लोगों के लिए मनोरंजन के उपयोग में लाया जाता रहा है। लेकिन, अब यह सिनेमाघर बंद हो गया है। इसकी इमारत काफी जर्जर हो चुकी है। यही नहीं इसी सिनेमा घर की इस जर्जर इमारत के नीचे ही कई दुकानदार अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। इसी इमारत से सटकर कई फुटकर दुकानदार भी सड़क पर अपनी दुकानें लगाकर व्यापार कर रहे हैं। इसी इमारत की छत का जर्जर हिस्सा कई बार जमीन पर गिर चुका है, जिससे यहां दुकानदार भी भयभीत रहते हैं। इस टाकीज के पास मुख्य बाजार होने के कारण शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोग यहां खरीदारी को पहुंचते हैं। इस इमारत की छत का छज्जा गिरने की आशंका हर समय बनी रहती है, इसके साथ ही तेज हवा और आंधी में तो यहां और भी अधिक खतरा बना रहता है।
विज्ञापन

ऐसा ही हाल राजकीय इंटर कॉलेज के पुराने भवन का भी है। इस स्कूल का भवन भी इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी तेज हवा या आंधी में धराशायी हो सकता है। यहां तक कि आम दिनों में भी इसके गिरने का खतरा बना हुआ है। जबकि, इस स्कूल भवन के किनारे से होकर हर रोज सैकड़ों स्कूली बच्चों का निकलना होता है। इससे भी बुरा हाल कचहरी परिसर स्थित पुराने कलेक्ट्रेट भवन का है। पुराने कलेक्ट्रेट के जर्जर भवन के पास कचहरी परिसर में कई अधिवक्ता अपना बस्ता जमाकर विधि व्यवसाय कर रहे हैं। बीते दो वर्ष के दौरान इस जर्जर भवन की छत से चार से पांच बार बड़े पत्थर अचानक जमीन पर गिरने से बड़ा हादसा होने से बचा है। अधिवक्ताओं द्वारा पूर्व में जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर उक्त भवन की या तो मरम्मत कराए जाने या फिर भवन को पूरी तरह गिराने की मांग की थी, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाने के कारण आए दिन यहां छत की पत्थरों के टुकड़े गिरते रहते हैं। जिससे अधिवक्ताओं में यहां से निकलने के दौरान हादसों का भय बना रहता है।
विज्ञापन

हालांकि, जिला प्रशासन द्वारा इस भवन के पास चेतावनी का बोर्ड लगवा दिया है, ताकि इस भवन से लोग दूर रहें। अब कुछ महीनों से इस भवन के नीचे बैठने वाले अधिवक्ताओं ने अपना ठिकाना जरुर बदल लिया है, लेकिन अब भी कई अधिवक्ता इसी भवन से सटकर विधि व्यवसाय के लिए बैठते हैं और कई अधिवक्ता व वादकारी इसी भवन से सटकर निकलते हैं। यदि इन पुराने जर्जर भवनों के संबंध में प्रशासन द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो इन भवनों के कभी भी धराशायी होने के कारण बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ हाल नवीन गल्ला मंडी में मंडी समिति के भवन के छज्जे का है। इस भवन का एक पिलर और उसका छज्जा गिरने की कगार पर है, जबकि इसी छज्जे से होकर कर्मचारियों व किसानों को निकलना पड़ रहा है।

ऐसी जर्जर इमारतों की जांच कराने के बाद जो भी प्रावधान होगा, उसके अनुसार उचित प्रक्रिया अपनाकर कार्रवाई कराई जाएगी।
- डॉ. संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें