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आदर्श ग्राम पारौल में स्कूली बच्चे नहीं जानते गिनती पहाड़े

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आदर्श ग्राम पारौल में बच्चे नहीं जानते पहाड़े
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डोंगरा खुर्द/अर्जुन खिरिया (ललितपुर)। विकास खंड मड़ावरा अंतर्गत आदर्श ग्राम पारौल में प्राइमरी शिक्षा का बुरा हाल है। जहां जीर्णशीर्ण भवनों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं, विद्यालय के अधिकांश बच्चे ठीक से किताब नहीं पढ़ पाते हैं तो कइयों को गिनती पहाड़े तक नहीं आते।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने ग्राम पारौल को गोद ले रखा है, लेकिन यहां की तस्वीर नहीं बदल पाई है। विशेषकर प्राइमरी शिक्षा का स्तर बेहद चिंताजनक है। प्राथमिक विद्यालय प्रथम पारौल में अधिकांश बच्चे ठीक से किताब नहीं पढ़ पाते हैं तो कइयों को गिनती पहाड़े भी नहीं आते हैं। ग्रामीणों द्वारा आरोप लगाया गया है कि विद्यालय का खुलने एवं बंद होने का कोई समय निश्चित नहीं है, जिसका विपरीत असर बच्चों के शैक्षिक स्तर पर साफ देखा जा सकता है। विद्यालय में 156 छात्रांकन के सापेक्ष चार अध्यापक तैनात हैं। इनमें से विद्यालय मात्र एक या दो शिक्षक ही आते हैं। इससे तमाम बच्चों ने भी विद्यालय से किनारा कर लिया है। आमतौर पर विद्यालय में 15-20 बच्चे ही उपस्थित रहते हैं। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय सिंगरवारा एक शिक्षक के सहारे ही संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में छात्रांकन 119 के सापेक्ष चार पांच बच्चों की ही उपस्थिति देखी जा रही है। अध्यापक ज्योतिरादित्य पटेल का कहना है कि गांव में दो अमान्य विद्यालयों के संचालित होने से विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति नहीं बढ़ पा रही है। अमान्य विद्यालयों की जानकारी विभागीय अधिकारियों को कई बार दे चुके हैं। गांव सिंगरवारा का विद्यालय काफी जीर्णशीर्ण हालत में है। विद्यालय भवन कई जगह से दरक गया है। विद्यालय की चहारदीवारी में कई जगह क्रेक आ गए हैं। ऐसे हालात में बच्चे एवं शिक्षक बैठने को मजबूर हैं। यदि विभागीय अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो अप्रिय घटना कभी भी घट सकती है। वहीं, शौचालयों में गंदगी भरी पड़ी है साथ ही गेट टूटे पड़े हैं। बच्चे खुली जगह में लघुशंका के लिए बाहर जाते हैं। रही सही कसर कुछ ग्रामीणों ने पूरी कर दी है। कई लोगों ने विद्यालय परिसर को अपना खलिहान बना लिया है। परिसर में ही कई लोग अपना अनाज सुखाने के लिए डाल देते हैं।
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स्कूलों में नहीं पहुंचते सह समन्वयक
परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक सपोर्ट के लिए सह समन्वयक नियुक्त किए गए हैं लेकिन अधिकांश सह समन्वयक स्कूलों के भ्रमण पर नहीं पहुंचते और वे कागजी खानापूरी कर रहते हैं। जिस वजह से स्कूलों में बच्चों के शैक्षिक स्तर में सुधार नहीं आ रहा है। इसमें उन्हें विभागीय अधिकारियों की शह मिली हुई है।
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दोषियों के खिलाफ करेंगे कार्रवाई
दोनों विद्यालय जर्जर हालत में है, इनकी सूचना पहले ही उच्चाधिकारियों को दे चुके हैं। बच्चों को घर पर कोई आवश्यक काम आ गया होगा, जिससे स्कूल में बच्चों की संख्या कम रही होगी।
राम गोपाल वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी मड़ावरा
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