सरकारी केंद्रों पर मुफ्त लगेगी वैक्सीन
ललितपुर। जनपद में लोगों को टेटनस और डिप्थीरिया जैसी बीमारी से निजात दिलाने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं और 10 साल से 16 साल तक के बच्चों को नियमित टीकाकरण करेगा। इससे दोनों बीमारियों की रोकथाम में मदद मिल सकेगी।
टीकाकरण सारणी के अंतर्गत अभी तक गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को टीटी के दो इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इसमें पहली डोज देने के ठीक एक माह बाद दूसरी डोज दी जाती है। अब टीटी का स्वरूप और कार्य बदलने जा रहा है। कई परिक्षणों के बाद इस टीके के साथ एक और जानलेवा बीमारी से बचाव को शामिल किया जा रहा है। इस जानलेवा बीमारी को डिप्थीरिया व गलाघोटू कहते हैं। डिप्थीरिया और टेटनस जीवाणु द्वारा उत्पन्न होने वाले रोग हैं, जो हर उम्र के व्यक्तियों को हो सकता है। खासतौर से यह दोनों बीमारी बड़े लोगों की तुलना में बच्चों को अधिक होती है। दोनों बीमारियों से बचाव के लिए अब तक टीटी और डिप्थीरिया के टीके अलग-अलग लगाये जाते हैं लेकिन इसका संयोजन तैयार हो गया है। इस संयोजन का नाम टीडी रखा गया है। वर्ष 2018 में भारत में टीकाकरण सर्वेलेंस के आंकड़ों के अनुसार, डिप्थीरिया के ज्यादातर मामले पांच वर्ष या उससे ज्यादा की आयु वर्ग में सामने आये हैं। वर्ष 2017 और 2018 में 77 प्रतिशत और 69 प्रतिशत है। हालांकि, वर्ष 1999 से टिटनेस के कारण होने वाली मृत्यु की दर में 80 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, डिप्थीरिया का आउट ब्रेक बढ़ रहा है जो डिप्थीरिया के प्रतिरोधक क्षमता की कमी को जाहिर करता है। इसलिए डिप्थीरिया, टेटनस, पेरटोसिस, डीटीपी के प्राथमिक टीकाकरण के बाद नवजात में डिप्थीरिया के विरुद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। निरंतर सुरक्षा के लिए डिप्थीरिया टाक्साईड युक्त टीको की बूस्टर खुराकें आवश्यक है।
अगले माह से लगाए जाएंगे टीडी के टीकेवर्तमान में टेटनेस के टीके लगाए जा रहे हैं। अब इसमें डिप्थीरिया से बचाव का भी टीका सम्मिलित किया गया है। जिससे अब टीटी की जगह टीडी टीका के नाम से जाना जाएगा। इससे जानलेवा डिप्थीरिया और टेटनस से बचाव हो सकेगा।
डा. हुसैन खान, जिला नोडल टीकाकरण अधिकारी