फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परिषदीय विद्यालय को संवारेगें ग्राम प्रधान, चतुर्थ राज्य वित आयोग से मिलेगी बिजली

विज्ञापन
विज्ञापन
परिषदीय विद्यालय को संवारेंगे ग्राम प्रधान
विज्ञापन

चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से मिलेगी बिजली
शासन ने जिलाधिकारी व पंचायतीराज अधिकारी को जारी किए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। ग्रामीण अंचलों में संचालित परिषदीय विद्यालयों को मूलभूत सुविधाओं व रखरखाव की जिम्मेदारी अब लगभग पूरी तरह से गांव के जनप्रतिनिधियों यानी ग्राम प्रधान को सौंप दी गई है। विद्यालय भवन व शौचालय की मरम्मत व पेयजल व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी पहले ही पंचायतीराज विभाग को सौंपी जा चुकी है और अब विद्यालयों की विद्युत व्यवस्था को सुचारु रखना व बिजली का बिल भुगतान करने की भी जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग को सौंप दी है।
नगर व कस्बा क्षेत्र में संचालित परिषदीय विद्यालयों को छोड़कर ग्रामीण इलाकों व दूरदराज इलाकों में संचालित हो रहे अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में अभी भी बिजली की समस्या बनी हुई है। जनपद में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों मिलाकर डेढ़ हजार से अधिक परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें से एक हजार विद्यालय ऐसे है जहां पर बिजली की समस्या है, करीब 60 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में बिजली ही नहीं है। बिजली के अभाव में पंखा नहीं चलने से बच्चों को गर्मियों के दिनों में काफी परेशानी होती है और कई विद्यालयों में कंप्यूटर होने के बाद भी बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा नहीं मिल पा रही है। शासन द्वारा इन परिषदीय विद्यालयों में बिजली की व्यवस्था कराने के लिए विगत कई वर्षों से प्रयास कर रही हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। हाल ही में शासन ने ग्रामीण इलाकों में संचालित हो रहे परिषदीय विद्यालयों में बिजली व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी पंचायतीराज विभाग को सौंप दी है। इस संबंध में प्रदेश शासन के अमर मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने डीएम व पंचायतीराज अधिकारी को निर्देश जारी कर दिए हैं। चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के तहत ग्राम पंचायतों को दी जाने वाले वार्षिक बजट का 50 फीसदी धनराशि का उपयोग ग्राम पंचायतों की पूर्व में सृजित संपत्तियों को समुचित रखरखाव में किया जा सकता है, इसी मत के तहत परिषदीय विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन कराए जाएगें और बिजली के बिल का भुगतान भी किया जाएगा। जहां पर बिजली के संयोजन के व्यवस्था नहीं हो सकती है, वहां उस विद्यालय में ग्राम पंचायतों द्वारा सौर ऊर्चा प्लांट स्थापित कराकर बिजली की व्यवस्था कराई जाएगी। ग्राम पचायत द्वारा 600 वाट के सोलर पैनल व लीथियम बैटरी (25 एंपियर) की उपलब्ध कराई जाएगी। इसी सुरक्षा की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की होगी और इसके अलावा उपकरणों की व्यवस्था भी खुद बेसिक शिक्षा विभाग को ही करनी होगी।
विज्ञापन


तीन सदस्यीय टीम होगी गठित
जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से निर्धारित प्रारूप पर विद्यालयों का सर्वे कराकर बिना बिजली कनेक्शन वाले विद्यालयों की संख्या निर्धारित की जाएगी। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला पंचायतराज अधिकारी व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की एक समिति गठित की जाएगी। इस तीन सदस्यीय टीम के नेतृत्व में विकासखंड स्तर पर सहायक विकास अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी संयुक्त पर्यवेक्षण में सर्वे कराकर बिना बिजली वाले प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की सूची बनाएगें।
विज्ञापन


पहले भी है रखरखाव व मरम्मत की जिम्मेदारी
पंचायतीराज विभाग व ग्राम पंचायतों पर पहले से विद्यालय भवनों के रखरखाव व मरम्मत की जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी शासन द्वारा पिछले वर्ष से ही सौंपी गई है। पंचायतीराज विभाग के चौहदवें राज्य वित्त आयोग की धनराशि से विद्यालय भवनों की मरम्मत, चारदीवारी की मरम्मत व शौचालायों का रखरखाव, सुचारु पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी है। अब शासन द्वारा बिजली उपलब्ध कराने की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने-अपने क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों को बेहतर व सभी सुविधाओं से युक्त बनाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें