टीबी की बीमारी में भारत का पांचवां स्थान
ललितपुर।
24 मार्च को विश्व क्षयरोग दिवस के उपलक्ष्य में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिरधा ब्लॉक के किसान इंटर कॉलेज में एक क्षय रोग संबंधी एक संगोष्ठी आयोजित की गई।
जिसमें बताया गया कि विश्व क्षयरोग दिवस के उपलक्ष्य में जिला क्षयरोग नियंत्रण केंद्र ,ललितपुर एवं अक्षय परियोजना के तत्वाधान में 27 मार्च को किसान इंटर कॉलेज ब्लॉक बिरधा में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिला क्षयरोग अधिकारी, ललितपुर डॉ. जेएस बक्शी ने बताया कि भारत वर्ष में प्रतिवर्ष 18 लाख लोग टीबी से ग्रसित होते हैं तथा उनमें से चार लाख लोग प्रतिवर्ष मर जाते हैं। विश्व में टीबी की बीमारी में भारतवर्ष 5वां स्थान रखता है तथा 22 सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत वर्ष टॉप पर है और यह भी बताया कि 1962 से 1992 तक राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम चला तत्पश्चात 1993 में एक पायलट प्रोजैक्ट के तहत 23.5 लाख जनसंख्या पर डॉट्स प्रणाली अपनाकर प्रभाव देखा गया जो कि बहुत ही सफल रहा और 1997 तक पूरे देश में डॉट्स पद्धति को लागू कर दिया गया। उन्होंने बताया कि संदिग्ध रोगी के दो बलगम परीक्षण कर रोग के बारे में पता लगाया जाता है। तदुपरांत रोगी को डॉट्स केंद्र पर प्रशिक्षित कार्यकर्ता की देखरेख में दवा खिलाई जाती है। वर्तमान में जनपद में सात टीबी यूनिट एवं 11 बलगम परीक्षण केंद्र तथा 343 डॉट्स केंद्र कार्यरत हैं। जहां रोगी का नि:शुल्क बलगम परीक्षण और दवा खिलाई जाती है। डॉट्स में रोगी के पंजीकरण के साथ ही उसकी दवाई के पूरे कोर्स का डिब्बा सुरक्षित कर दिया जाता है। अन्य बीमारियों की अपेक्षा टीबी से मरने वालों की संख्या वयस्कों में सबसे ज्यादा होती है। जून 2016 से जिला क्षयरोग नियंत्रण केंद्र ललितपुर में सीबीनॉट मशीन द्वारा ड्रग रेसिस्टेंट टीबी की जांच का कार्य प्रारंभ हो चुका है। यह भी बताया कि पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत सक्रिय क्षयरोगी खोज अभियान (एक्टिव टीबी केस फाइंडिग प्रोग्राम) जो कि 24 फरवरी से 10 मार्च 2018 तक चलाया गया। इस अभियान के लिये जनपद की 10 प्रतिशत लक्षित आबादी 137384 थी, जिसके लिए जनपद में 58 टीमों द्वारा प्रतिदिन के हिसाब से कुल 10 कार्य दिवसों में कार्य करके टीबी के संभावित मरीजों की खोज की गई और जिसके लिये 12 सुपरवाइजरों एवं सभी ब्लॉकों के चिकित्सा अधीक्षक/चिकित्सा अधिकारी को जिम्मेदार बनाया गया था। 24 फरवरी से 10 मॉर्च 2018 तक 147427 की आबादी को आच्छादित कर टीबी रोग के लिये स्क्रीनिंग की गई, जिसमें से 1274 मरीज टीबी के संभावित लक्षणों वाले मिले। इनमें प्रत्येक मरीज के दो बलगम की जांचे प्रयोगशाला में कराईं, जिनमें से 68 टीबी के कंफर्म मरीेज पाये गए, जिनका 48 घंटे के अंदर उपचार प्रारंभ कर दिया गया है। ब्लॉक के अनुसार देखें तो शहरी क्षेत्र में 03, महरौनी में 11, तालबेहट में 07, बिरधा में 18, जखौरा में 14, मड़ावरा में 11 एवं बार में 04 टीबी के कंफर्म मरीजों को खोज कर उपचार पर रख दिया गया है। अंत में किसान इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ने सभी का आभार जताया।