निजीकरण के विरोध में गरजे अभियंता
ललितपुर।
उत्तर प्रदेश में पांच शहरों व सात जनपदों में बिजली विभाग का निजीकरण करने के विरोध में मंगलवार को विद्युत अभियंता और कर्मचारियों ने जमकर विरोध जताते हुए एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया। विद्युत कर्मचारियों ने एक सुर में निजीकरण को कर्मचारी व उपभोक्ता के लिए अहितकारी बताया। चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ही निजीकरण की घोषणा का सरकार द्वारा वापस नहीं लिया जाता है, तो बिजली विभाग के कर्मचारी एक साथ अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
पांच महानगरों और सात जिलों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किए जाने के विरोध में मंगलवार को विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के आह्वान में अभियंताओं व कर्मचारियों ने विद्युत वितरण मंडलीय कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर कार्य बहिष्कार किया। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महानगरों (वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, मुरादाबाद और लखनऊ) का निजीकरण एवं सात जनपदों (रायबरेली, मऊ, बलिया, उरई, इटावा, कन्नौज एवं सहारनपुर) में एकीकृत सेवा प्रदाता के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपने के टेंडर जारी किए हैं। कहा गया कि ऐसे जिलों जिनकी सारी व्यवस्था सरकारी कर्मचारियों द्वारा दुरुस्त कर दी गई और थ्रू रेट भी सम्मानजनक हो रहा था, उन क्षेत्रों के निजीकरण उचित कदम नहीं है। संघर्ष समिति, ललितपुर के विरोध प्रदर्शन में अभियंता, अवर अभियंता, कार्यालय सहायक संवर्ग, परिचालकीय संवर्ग, चतुर्थ श्रेणी और प्राइवेट संविदा कर्मचारी उपस्थित रहे। समिति के संयोजक अधीक्षण अभियंता परशुराम सिंह ने कहा कि पांच शहरों के निजीकरण और सात जनपदों के निजीकरण के फैसले से कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में आगरा और कानपुर को निजी क्षेत्र में करने का फैसला सरकार ने लिया था। आगरा को एक अप्रैल 2010 को टोरेंट कंपनी को हस्तगत करा दिया गया और कानपुर कारपोरेशन हित में ही अनवरत विद्युत वितरण कराता रहा। आज स्थिति यह है कि आगरा का थ्रू-रेट 3.25 और कानपुर का थ्रू-रेट 6.30 है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि आगरा में टोरंट से करार घाटे का सौदा साबित हुआ है। पावर कार्पोरेशन को 5,348 करोड़ का घाटा हुआ है। इसके बावजूद पांच महानगरों एवं सात जनपदों की बिजली व्यवस्था के निजीकरण का फैसला हास्यास्पद है। अधिशासी अभियंता डीआर विमलेश ने कहा कि अच्छी बिजली और सस्ती बिजली पावर कार्पोरेशन ही मुहैया करा सकता है । अधिशासी अभियंता आकाश सचान ने कहा कि यदि निजीकरण वापस नहीं लिया जाता है तो संघर्ष समिति अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकती है। अधिशासी अभियंता बाबूलाल ने कहा कि सभी संगठनों को एकजुट होना होगा। उप्र सरकार और पावर कार्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे हैं। इस जनविरोधी फैसले से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और आम जनमानस को मंहगी बिजली उपलब्ध होगी। इस मौके पर महेश चंद्र विश्वकर्मा, सौरभ पटैरिया, शैलेंद्र राजपूत, राजेश पटेल, कृष्ण कुमार शर्मा, रमेश चंद्र, राहुल सिंह, नीलम वर्मा, अखिलेश कुमार वर्मा, विनय साहू, महेश चंद, जगदीश प्रसाद, रमेश यादव, अरविंद गौतम, राजकुमार, चंद्रप्रकाश, बृजेंद्र पाल, एसपी सिंह, पंकज मौर्या, मोहित सोनी, धनंजय, विकास प्रजापति, नेहा पांडेय, जगदीश प्रसाद, अजित कुमार दीक्षित, अविनाश कुमार वर्मा, एसके चौहान, बच्चू सिंह, आरके सिंह, अरविंद कुमार पाखरे, शालिकराम कुशवाहा, रमेश कुमार कुशवाहा, सुनील पाल, चंदन सिंह, कालीचरन, महेंद्र पंथ, महेंद्र पाल सिंह मौजूद रहे।