मनरेगा में कम हुई रोजगार की मांग
खरीफ फसल की कटाई में व्यस्त हैं कामगार
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में रोजगार की मांग अचानक कम हो गई है। इसे मौजूदा वित्तीय वर्ष में सबसे कम माना जा रहा है। सितंबर माह में 5017 की तुलना में 1459 परिवारों को ही रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इससे काम की गति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मनरेगा में स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। योजनांतर्गत जिले में 159139 जाबकार्डधारक पंजीकृत हैं। इसमें से 34646 परिवारों को ही अभी तक रोजगार मुहैया कराया जा सका है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में माहवार डिमांड पर नजर डालें तो माह अप्रैल में 7180, मई में 16444, जून में 21427, जुलाई में 12272, अगस्त में 11678, सितंबर में 5017 परिवारों ने रोजगार की मांग की है। इस तरह जून माह में सबसे ज्यादा रोजगार की मांग रही। वहीं, इस माह की डिमांड सबसे कम रही है। इस समय 1459 परिवारों को ही रोजगार मुहैया कराया गया है, इसमें ब्लाक बार के अंतर्गत सबसे कम 66 परिवार ही रोजगार से जुड़ सके हैं। रोजगार की मांग घटने के पीछे खरीफ फसल की चल रही कटाई को मुख्य वजह माना जा रहा है। विभागीय कर्मियों को अगले माह से योजना की प्रगति में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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ब्लाक महरौनी फिसड्डी
सौ दिन का रोजगार देने के मामले में ब्लाक महरौनी पिछड़ता दिखाई दे रहा है। जहां ब्लाक महरौनी की प्रगति शून्य दर्शाई जा रही है, वहीं ब्लाक मड़ावरा सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में अन्य ब्लाकों से आगे चल रहा है। यहां अभी तक 44 परिवार सौ दिन का काम ले चुके हैं। इसके बाद ब्लाक जखौरा का नंबर है। कुल मिलाकर जिले में 89 परिवारों को सौ दिन का काम मिला है। यदि अनुसूचित जनजाति परिवारों के रोजगार पर गौर करें तो ब्लाक तालबेहट, महरौनी व बार फिसड्डी है। इन तीनों ब्लाकों में एक भी एसटी परिवार को सौ दिन का रोजगार नहीं दिया जा सका है।
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फसलों की कटाई से पड़ा असर
इस समय फसलों की कटाई चल रही है, जिससे काम की मांग कम हुई है। इस संबंध में बीडीओ व एपीओ के साथ बैठक की है। जहां तक भुगतान की बात है तो तकनीकी गड़बड़ी के चलते श्रमिकों के खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं हो रहा है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
जय सिंह
उपायुक्त श्रम रोजगार।