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45 गांवों में ठप पड़े मनरेगा कार्य

Fri, 22 Jan 2016 12:53 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में कार्य कराने के लिए मुख्य विकास अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश हवा हवाई साबित हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले की 45 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम ठप पड़े हैं।
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बुंदेलखंड से ग्रामीणों को पलायन रोकने के उद्देश्य से मनरेगा योजना चलाई जा रही है। योजना के अंतर्गत जॉबकार्ड धारक को 150 दिन काम मुहैया कराया जाना है, लेकिन मनरेगा कामों की सुस्त चाल से जॉब कार्ड पर150 दिन काम नहीं मिल पा रहा है। सीडीओ ने इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों में कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए थे। जिले की 416 में से 371 ग्राम पंचायतों में ही काम चल रहे हैं, उनकी गति भी सुस्त है।

विभागीय आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो ब्लॉक बार में 56 ग्राम पंचायतें, तालबेहट में 39, महरौनी में 65, मड़ावरा में 61, जखौरा में 86 और  बिरधा में 64 ग्राम पंचायतों में कुल 889 काम संचालित हो रहे हैं, जबकि 45 ग्राम पंचायतों में काम ठप पड़ा है। इस साल गठित हुई अधिकांश ग्राम पंचायतों में अभी काम शुरू नहीं हो पाए हैं। ऐसी ग्राम पंचायतों में स्थानीय श्रमिकों को काम नहीं मिल पा रहा है।
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मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार उपाध्याय ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो-दो काम निरंतर चलाए जाने के निर्देश बीडीओ को दे रखे हैं, इसके बावजूद ग्रामों में रोजगार सृजन नहीं हो पा रहा है। इसका विपरीत असर मजदूरों पर पड़ रहा है।

889 काम चल रहे
इस  समय विभिन्न ब्लाकों में 889 कार्य चल रहे हैं, जिनमें 14,968 कामगार काम कर रहे हैं। ब्लॉक बार में 2,120, तालबेहट में 1,940, महरौनी में 2,388, मड़ावरा में 3,972, जखौरा में 2,633 और बिरधा में 1,915 जॉब कार्डधारक श्रमिक कार्यरत हैं।

इंसेट बाक्स-------2
नवसृजित पंचायतें
ब्लाक बार में 7 ग्राम पंचायतें, तालबेहट में 7, महरौनी में 11, मड़ावरा में 14, जखौरा में 18 और बिरधा में 19 नवसृजित ग्राम पंचायतें हैं।

जॉब कार्डधारक
जिले  में 1,68,453 जॉब कार्डधारक हैं। इनमें से 60,552 को ही काम उपलब्ध कराया जा सका है। इतना ही नहीं, 2,972 परिवार सौ दिन का  रोजगार पा सके हैं। इससे मनरेगा की प्रगति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह है दिक्कत
जिन ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत काम शुरू नहीं हो सके हैं, वहां पर ग्राम प्रधानों को अभी शपथ नहीं दिलाई गई है। दरअसल, उक्त ग्रामों में ग्राम पंचायत सदस्यों का कोरम पूरा नहीं हो सका है। इस कारण उक्त ग्राम पंचायतों में अभी ग्राम प्रधान के स्थान पर ग्राम विकास अधिकारी ही कार्य देख रहे हैं और वे मनरेगा के कार्यों में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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