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पंजीयन निरस्त के बाद भी चलाई जा रहीं पैथोलॉजी

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पंजीयन निरस्त के बाद भी चलाई जा रही पैथोलॉजी
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ललितपुर। आम जन को संक्रामक बीमारियों से बचाव का रास्ता दिखाने वाले स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम ही धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसकी बानगी बायोमेडीकल वेस्ट मेटेरियल का निस्तारण है। इसके लिए विभाग ने नियम कायदे तो बनाए गए हैं लेकिन कई पैथोलॉजी उन्हें हवा में उड़ाते दिख रहीं हैं। विभाग ने कई इकाइयों के पंजीयन निरस्त किए हैं, इसके बाद भी कुछ इकाइयां मानकों को पूरा करने की जगह विभाग को ही चुनौती दे रही हैं। ऐसे में वेस्ट मेटेरियल का निस्तारण होना मुश्किल साबित हो रहा है।
जिले में बढ़ रहे प्रदूषण व संक्रमण की चपेट में आने से कई लोग विभिन्न बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल का वेस्ट मेटेरियल भी बीमारियों को बढ़ा रहा है। जिसे ध्यान में रखकर इस पर नियंत्रण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बायो मेडिकल वेस्ट मेटेरियल का निस्तारण करना अनिवार्य करने का प्रावधान किया है। इसके बाद भी कई इकाइयां निस्तारण में रुचि नहीं ले रही हैं। जिन पर विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही है। बीते दिनों संबंधित कुछ इकाइयों के पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई प्रारंभ की गई है। कुछ इकाइयां स्वास्थ्य विभाग के नियमों का हवा में उड़ाते दिख रही हैं। इससे उनका धरातल पर असर नजर नहीं आ रहा है। हालत यह है कि बीते दिनों विभाग ने विकासखंड बार व शहर में स्थित एक पैथोलॉजी के साथ एक नर्सिंग होम पर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराने में रुचि नहीं दिखाने पर पंजीयन निरस्त की कार्रवाई की है। इसके बाद भी दोनों पैथोलॉजी संचालकों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। वे पूर्व की भांति काम कर रही हैं। इस समय जिले में लगभग 250 स्वास्थ्य इकाईयां चल रहीं है। डेढ़ माह बीतने के बाद भी अब तक केवल 123 इकाइयों ने आवेदन दिए हैं, जबकि आधी से अधिक इकाईयों ने पंजीयन में रुचि ही नहीं ली है। इससे बायोमेडीकल वेस्ट मेटेरियल का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
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अवैध पैथोलॉजी लैब पर कैसे हो कार्रवाई ?
विभाग द्वारा पंजीकृत स्वास्थ्य इकाइयों को बायो मेडिकल वेस्ट मेटेरियलय के निस्तारण करने के लिए प्रदूषण बोर्ड में पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जिले में कई पैथोलॉजी लैब ऐसी भी चल रहीं हैं कि जिनका रिकार्ड विभाग के पास भी नहीं है, जिससे बायो मेडिकल वेस्ट मेटेरियल का पूरा निस्तारण होना असंभव है।

कार्रवाई न होने खुले आम हो रहीं संचालित
स्वास्थ्य विभाग में पैथोलॉजी लैब, क्लीनिक, नर्सिंग होम व अन्य स्वास्थ्य इकाइयों की जांच व मानकों के लिए एक टीम गठित की है। इसका कार्य निरीक्षण कर मानकों व अवैध स्वास्थ्य इकाईयों पर लगाम लगना है। लेकिन, यहां पर कई इकाईयां ऐसी चलाई जा रहीं है कि जिनका विभाग के पास रिकार्ड भी नहीं है। इसके बावजूद इकाइयां चल रहीं हैं, जिससे विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न खड़े होते हैं।

यह हैं मानक
बायोमेडिकल वेस्ट मेटेरियल को रखने के लिए रंग कोड के बैग जारी किए गए है। इनमें पीले बैग में जलाने वाले कचरे को रखा जाएगा। लाल बैग में रिसाइकिल कचरा को एकत्रित किया जाएगा। सफेद बैग में धातु व नोकदार मेडिकल कचरा को रखा जाएगा। नीले रंग के बैग में कांच व धातु कचरा को रखा जाएगा। इसके साथ ही समय-समय पर बैगों को बदला जाएगा। इन सभी बैगों को एक बंद कमरे में बने गड्ढे में रखा जाएगा, जिससे कि कचरा चोरी व जानवरों से बिखराव न हो सके। इन मानको को पूरा करने में इकाइयां लापरवाही बरत रही हैं।
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बायोमेडिकल वेस्ट मेटेरियल के निस्तारण के लिए प्रदूषण बोर्ड से पंजीयन कराने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद भी कई इकाइयों ने अभी तक रुचि नहीं ली है। इसके लिए विभाग द्वारा तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है, जो जांच अभियान चलाकर पंजीयन न कराने वाली इकाइयों पर कार्रवाई करेगी।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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