अब किराए के भवनों में नहीं खुलेंगे निजी स्कूल
ललितपुर। अब अशासकीय प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल की मान्यता लेना आसान नहीं रहा। शासन ने मान्यता नियमों में कई बदलाव किए हैं। इसमें किराए के भवन में मान्यता देने के प्राविधान को हटा दिया गया है। यही नहीं, आवेदन व विलंब शुल्क में कई गुना बढ़ोत्तरी की गई है। मान्यता नियमों में बदलाव से स्कूल खोलने की चाह रखने वाले कई लोगों को बड़ा झटका लगा है।
निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं राज्य सरकार द्वारा पारित निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 में प्राविधानों को ध्यान में रखकर अशासकीय विद्यालयों की मान्यता में बदलाव किए गए हैं। इसमें विद्यालय के लिए उपयुक्त निजी भवन होने पर ही मान्यता के लिए विचार किया जा सकता है। मान्यता के लिए उन्हीं प्रकरणों पर विचार किया जाएगा, जहां पर महायोजना/सेक्टर प्लान में भू उपयोग विद्यालय के नाम अंकित होगा। विद्यालय का मानचित्र संगत प्राधिकारी से स्वीकृत होना अनिवार्य होगा। विद्यालय प्रबंध तंत्र द्वारा संबंधित सहायक अभियंता से भवन नेशनल बिल्डिंग कोड के मानकों के अनुरूप होने का प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाएगा। विद्यालय में नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुरूप भवन की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। विद्यालय प्रबंध तंत्र द्वारा निरीक्षण के लिए मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष निर्धारित प्रारूप पर आवेदन किया जाएगा। भवन निर्माण का औचक निरीक्षण लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर विकास विभाग एवं ग्रामीण अभियंत्रया विभाग के सहायक अभियंता द्वारा किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान भवन में धूप व ठंड से बचाव की व्यवस्था, कक्षा कक्ष हवादार, रोशनीयुक्त, एक मंजिल से अधिक ऊंचे भवनों की सीढ़ियां, रैंप व नेशनल बिल्डिंग कोड में निर्धारित मानकों को देखा जाएगा। विद्यालय भवन के आगे विद्यालय का नाम, मान्यता का वर्ष, विद्यालय का कोड, मान्यता प्रदान करने वाली संस्था/ निकाय का प्रतीक चिन्ह और नाम सुस्पष्ट रूप से अंकित किया जाएगा। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रति छात्र नौ वर्ग फीट की दर से स्थान उपलब्ध होना चाहिए। प्रत्येक कक्षा कक्ष में कम से कम बीस बच्चों के बैठने की व्यवस्था अनिवार्य है। विद्यालय में पुस्तकालय व वाचनालय एवं क्रीड़ा होना चाहिए। प्राथमिक विद्यालय में आवेदन शुल्क बढ़ाकर दो हजार से दस हजार रुपये एवं जूनियर हाईस्कूल में तीन हजार रुपये की जगह 15 हजार रुपये किया गया है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय के लिए सुरक्षित कोष के रूप में एक लाख रुपये की एनएससी/एफडी व उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए एक लाख पचास हजार रुपये की एनएससी/एफडी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पदनाम से प्लेज्ड होगी। इससे पहले प्राथमिक विद्यालय के लिए दस हजार व जूनियर हाईस्कूल के लिए 35 हजार रुपये की एनएससी बनवाई जाती थी।
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ये है मान्यता समिति
प्राथमिक विद्यालय की मान्यता समिति में अध्यक्ष बीएसए, संबंधित जिले के मुख्यालय पर तैनात बीईओ सदस्य/सचिव, सदस्य के रूप में डायट प्राचार्य को रखा गया है। वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालय की मान्यता समिति में अध्यक्ष ऐडी बेसिक झांसी, सदस्य/सचिव बीएसए व सदस्य के रूप में मुख्यालय पर तैनात बीईओ को शामिल किया गया है।
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नहीं चला सकेंगे स्कूल की शाखा
बीएसए की पूर्व अनुमति के बगैर संस्था द्वारा कक्षा अथवा कोई अनुभाग नहीं खोला जाएगा और न ही बंद किया जाएगा। किसी भी विद्यालय को शाखा चलाने की अनुमति नहीं होगी। शिक्षण शुल्क में कोई वृद्धि तीन वर्ष तक नहीं की जाएगी। शुल्क में जब भी वृद्धि की जाएगी, वह दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
मान्यता शर्तो में किए गए बदलाव
निजी विद्यालय को मान्यता देने के लिए शर्तों में कई बदलाव किए गए हैं। जिन्होंने पूर्व में आवेदन किए हैं, अब उन्हें लौटाया जा रहा है। सभी को नए शर्तों के साथ आवेदन करना होगा।
घनश्याम वर्मा, बीएसए