जर्जर छत व उखडे़ फर्श में बैठकर पढ़ रहे छात्र
ललितपुर। जनपद में परिषदीय व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का हाल बहुत खराब है। अधिकारियों की उदासीनता की वजह से विद्यार्थियाें को जर्जर छत के नीचे व उखडे़ फर्श पर बैठकर पढ़ना पढ़ रहा है। अव्यवस्था का आलम यह है कि जिले के 207 विद्यालयों में चारदीवारी तक नहीं है। इसके अलावा 158 स्कूलों के कक्षों व शौचालयों की हालत खस्ता पड़ी है। उधर ग्राम पंचायत के खाते में लाखोें रुपये आने के बाद भी जिम्मेदार गांव के जनप्रतिनिधि इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017-18 से परिषदीय विद्यालयों को संवारने की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को सौंप दी है। पंचायती राज विभाग की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायतों को हर साल 14वें वित्त आयोग से 18 लाख रुपये दिए जाते हैं। यदि ग्राम पंचायत बड़ी है तो वहां पर 50 से 60 लाख रुपये तक धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। यह सारी धनराशि ग्राम निधि में सीधे भेजी जाती है। ग्राम पंचायत में ग्रामीण सुविधाओं के लिए खर्च होने वाली इस धनराशि से ग्राम पंचायत क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों की चारदीवारी, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, खराब पड़े हैंडपंप व शौचालयों की मरम्मत, पेयजल के लिए समरसेबिल की सुविधा, स्कूल भवन व कक्षों की मरम्मत, विद्यालय कक्षों का पक्का फर्श, शौचालय में टाइल्स आदि लगवाने की जिम्मेेदारी ग्राम पंचायतों की सौंपी गई है। शासन के निर्देशों के बाद भी पंचायती राज विभाग के अधिकारियों व विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तरीय अधिकारियों द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जनपद के 105 परिषदीय प्राथमिक विद्यालय और 102 परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर चार दीवारी है ही नहीं और यदि है भी तो वह क्षतिग्रस्त है। कुल 207 परिषदीय विद्यालयों में चार दीवारी का काम होना है। इसके अलावा जनपद के करीब 158 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जिन स्कूलों के भवनों में छत की मरम्मत का कार्य, फर्श की मरम्मत, विद्यालय के मुख्य द्वार, कक्षों की खिड़की-दरवाजों की मरम्मत, दीवारों की मरम्मत का कार्य किया जाना है, जबकि इसमें महरौनी व मड़ावरा विकाखंड के स्कूलों की सूचना शामिल नहीं है। इसके अलावा अन्य 255 विद्यालयों की मरम्मत व पानी के लिए रीबोर और 384 शौचालय ऐसे हैं जहां मरम्मत होनी है। ग्राम पंचायतों के खातों में हर वर्ष लाखों रुपये आने के बाद भी ग्राम पंचायत के मुखिया यानि ग्राम प्रधान अपने ही गांव के बच्चों की समस्याओं की परवाह न करते हुए स्कूल भवनों की दुर्दशा को अनदेखा कर रहे हैं। बरसात में बच्चों को पानी छपकती हुए छत के नीचे और उखड़े हुए फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ेगा।
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चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की 50 फीसदी धनराशि रखरखाव में होती खर्च
14वें राज्य वित्त आयोग के अलावा भी पंचायती राज विभाग में चतुर्थ राज्य वित्त आयोग निधि में जनपद के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये आते है। शासनादेश के अनुसार इस चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की कुल धनराशि का 50 फीसदी धनराशि का व्यय ग्राम पंचायतों के अधीन पहले से निर्मित सरकारी संपत्ति व भवनों के रखरखाव में किया जाता है। जनपद की ग्राम पंचायतों की जमीनी हकीकत देखें तो लगभग सभी ग्राम पंचायतों में सामान्य रुप से ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों के भवन ही होते हैं, जो सरकार की संपत्ति होती है। ग्राम पंचायतों में शासनादेश के अनुसार चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की 50 फीसदी धनराशि का व्यय नहीं किया जाता है। इसलिए जनपद के इन परिषदीय स्कूलों की यह हालत है। यदि नियमित रखरखाव होता इतनी समस्या नहीं बनती।
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विकासखंड का नाम बार बिरधा महरौनी मड़ावरा जखौरा तालबेहट नगर योग
रीबोर योग्य हैंडपंप 22 24 26 16 24 31 01 144
मरम्मत योग्य हैंडपंप 16 51 05 20 01 18 शून्य 111
बालकों के मरम्मत योग्य शौचालय 32 65 21 18 31 33 01 201
बालिकाओं के मरम्मत योग्य शौचालय 26 63 22 18 30 23 शून्य 183
चारदीवारी निर्माण योग्य प्राथमिक विद्यालय 08 08 38 15 21 17 01 108
चारदीवारी निर्माण योग्य उच्च. प्रा. विद्यालय 13 17 37 14 16 19 02 118
छत, फर्श, खिड़की-दरवाजे व दीवार की मरम्मत वाले विद्यालय 21 27 20 23 34 33 सूचना शून्य 158
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भेजी जा चुकी है सूचना
विद्यालयों में खराब व बंद पड़े हैंडपंपों, शौचालयों व भवन मरम्मत एवं चार दीवारी के निर्माण वाले विद्यालयों की सूची पहले ही जिला पंचायती राज अधिकारी को भेजी जा चुकी है। विभाग से अभी तक मरम्मती करण के कार्यों की समीक्षा की कोई सूचना वापस नहीं भेजी गई है।
- मायाराम
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।